दवाओं की आपूर्ति के बाद भी अटकाया भुगतान, झारखंड हाईकोर्ट ने गोड्डा सिविल सर्जन का वेतन रोका!
झारखंड हाईकोर्ट ने दवा आपूर्ति के बाद भुगतान लंबित रखने के मामले में गोड्डा सिविल सर्जन का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया। वित्त और स्वास्थ्य विभाग को आदेश की प्रति भेजी गई।

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने दवा आपूर्ति पूरा होने के सालों बाद भी भुगतान न किए जाने के एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने 'पामा फार्मास्युटिकल' की याचिका पर सुनवाई करते हुए गोड्डा के सिविल सर्जन (CS) का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है। अदालत में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता कंपनी ने बहुत पहले ही दवाओं की पूरी सप्लाई कर दी थी। इसके बावजूद गोड्डा के सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा बिना कोई स्पष्ट और ठोस वजह बताए लंबे समय से कंपनी का भुगतान अटका कर रखा गया था।
'मनमाना और अनुचित है भुगतान रोकना', वित्त और स्वास्थ्य सचिव को भेजी गई आदेश की कॉपी
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अफसर रजा ने पक्ष रखते हुए अदालत में दलील दी कि जब दवा की आपूर्ति पूरी हो चुकी है, तो भुगतान रोककर रखना पूरी तरह से मनमाना और गैर-कानूनी है। इससे याचिकाकर्ता के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का सीधा हनन हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने गोड्डा सिविल सर्जन का वेतन अगले आदेश तक रोकने के साथ-साथ इस आदेश की प्रति राज्य के वित्त विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को तुरंत भेजने का निर्देश दिया है, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके।
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