पलामू: जर्जर ट्रांसफॉर्मर बना मौत का खतरा! क्या 'Strict Liability' के तहत बच सकता है बिजली विभाग? जानिए कब बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों पर लागू हुई IPC की धारा 304 व 304A
पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के खामडीह गांव में वर्षों से जर्जर ट्रांसफॉर्मर और बदहाल बिजली तार ग्रामीणों के लिए बड़े हादसे का कारण बनते जा रहे हैं।

Medininagar Palamu पलामू: जर्जर ट्रांसफॉर्मर बना मौत का खतरा! क्या 'Strict Liability' के तहत बच सकत: पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के खामडीह गांव में वर्षों से जर्जर ट्रांसफॉर्मर और बदहाल बिजली तार ग्रामीणों के लिए बड़े हादसे का कारण बनते जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग ने अब तक न तो ट्रांसफॉर्मर बदला और न ही जर्जर तारों की मरम्मत कराई। आए दिन ट्रांसफॉर्मर से चिंगारियां निकलती हैं, तार जलने लगते हैं और स्पार्किंग होती रहती है, जिससे पूरे गांव में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रांसफॉर्मर के ठीक पास कई मकान हैं। झुके हुए बिजली तार घरों के सामने से गुजर रहे हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों की जान पर हमेशा खतरा बना रहता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। लोगों का आरोप है कि विभाग ने नया बिजली पोल तो लगा दिया, लेकिन आज तक ट्रांसफॉर्मर को नए पोल पर स्थानांतरित नहीं किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार ट्रांसफॉर्मर से निकली चिंगारियों के कारण आसपास अफरा-तफरी मच चुकी है, लेकिन लोगों की सतर्कता से बड़ी घटना टल गई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उपायुक्त से तत्काल हस्तक्षेप कर जर्जर ट्रांसफॉर्मर बदलने, झुके तारों को दुरुस्त करने और आवश्यक स्थानों पर सुरक्षित बिजली लाइन लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी। सुप्रीम कोर्ट ने तय की है बिजली विभाग की जिम्मेदारी ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला M.P. Electricity Board बनाम Shail Kumari एवं अन्य (2002) बिजली विभाग की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है। इस मामले में सड़क पर गिरे जीवित बिजली तार से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। बिजली बोर्ड ने तर्क दिया था कि किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा बिजली चोरी के कारण हादसा हुआ, इसलिए वह जिम्मेदार नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि बिजली जैसी खतरनाक व्यवस्था संचालित करने वाली एजेंसी की "Strict Liability" (कठोर दायित्व) होती है। यदि बिजली के तार, ट्रांसफॉर्मर या अन्य उपकरणों की वजह से किसी व्यक्ति की मौत या चोट होती है, तो बिजली आपूर्ति करने वाली संस्था अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। अदालत ने कहा कि बिजली विभाग का दायित्व है कि वह ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे। लापरवाही पर अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई ऐसे मामलों में केवल विभाग ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कानूनी कार्रवाई संभव है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु केवल लापरवाही के कारण होती है, तो परिस्थितियों के अनुसार IPC की धारा 304A लागू हो सकती है। वहीं, यदि जांच में यह सामने आता है कि खतरे की जानकारी होने के बावजूद जानबूझकर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई और उसके परिणामस्वरूप मृत्यु हुई, तो मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर IPC की धारा 304 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। इसका उदाहरण केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEBL) का वर्ष 2023 का आदेश है, जिसमें एक संविदा कर्मी की करंट लगने से मौत के मामले में सहायक अभियंता पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 के तहत आरोप लगाए गए थे। बाद में तकनीकी जांच समिति गठित कर दुर्घटना के कारणों की समीक्षा के आदेश दिए गए। यह दर्शाता है कि विद्युत दुर्घटनाओं में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। फिलहाल खामडीह गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका कहना है कि विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।
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