'अपनी धरती, अपना अंबर, अपना हिंदुस्तान!', सरला बिरला विवि में दिखा अनेकता में एकता का अद्भुत संगम
सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची में 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने अनेकता में एकता का संदेश दिया, जबकि सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित किया।

80th Independence Day: राजधानी रांची स्थित प्रतिष्ठित सरला बिरला विश्वविद्यालय (SBU) में स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय पर्व असीम देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और हर्षोल्लास के वातावरण में मनाया गया। विश्वविद्यालय के खेल प्रांगण में आयोजित इस गरिमामयी समारोह का शुभारंभ राष्ट्रीय ध्वज फहराने और तिरंगे को सलामी देने के साथ हुआ। ध्वजारोहण के उपरांत उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत का गायन किया। इसके साथ ही अमर शहीदों और राष्ट्रवीरों के सम्मान में गगनभेदी जयघोष तथा अनुशासित परेड का आयोजन किया गया, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति बिजय कुमार दलान ने पूरे विवि परिवार को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखी 'अनेकता में एकता', देशभक्ति गीतों ने भरा जोश
समारोह के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। छात्र-छात्राओं ने भारत के विभिन्न राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, योग और नाटकीय प्रस्तुतियों के माध्यम से मंच पर जीवंत कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने देश की भाषाई विविधता और लोक-संस्कृतियों को प्रदर्शित करते हुए 'अनेकता में एकता' का सुंदर संदेश दिया। इसके साथ ही गायकों की टोली ने “अपनी धरती, अपना अंबर, अपना हिंदुस्तान” जैसे प्रेरणादायी देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया और पूरा खेल प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष: सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने युवाओं को किया प्रेरित
समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सह प्लानिंग एंड डेवलपमेंट निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने अपने संबोधन में 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय चेतना और एकता का अमर मंत्र है। डॉ. वर्मा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल भावनाओं तक सीमित न रहकर अपने आचरण, शिक्षा, नवाचार और जिम्मेदार नागरिकता के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने युवाओं को अपने व्यक्तिगत सपनों और महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्र की प्रगति के साथ जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
वरिष्ठ शिक्षाविदों ने अनुशासन, नवाचार और राष्ट्रसेवा का दिया संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलसचिव प्रो. श्रीधर डांडिन ने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के विचारों, उनके चरित्र और कर्मों पर निर्भर करता है। कुलपति प्रो. सी. जगनाथन ने अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए छात्रों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने की सीख दी। वहीं विश्वविद्यालय के महानिदेशक प्रो. गोपाल पाठक ने युवा शक्ति को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए छात्रों से अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को सकारात्मक व सृजनात्मक दिशा में लगाने का आग्रह किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रेरणादायक उद्बोधनों के साथ संपन्न हुए इस समारोह ने सभी को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संकल्प दिलाया।
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