रिम्स में HIV पॉजिटिव मरीज का ऑपरेशन ,सदर अस्पताल और रिम्स के बीच बढ़ा विवाद
रिम्स में एचआईवी पॉजिटिव महिला का सामान्य मरीज मानकर ऑपरेशन कर दिया गया था। इस घटना के बाद संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब रिम्स प्रबंधन और सदर अस्पताल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया था जहाँ एक एचआईवी पॉजिटिव महिला का सामान्य मरीज मानकर ऑपरेशन कर दिया गया था। इस घटना के बाद संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब रिम्स प्रबंधन और सदर अस्पताल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। रिम्स में जांच के लिए किट की भारी कमी है ।
रिम्स में ब्लड टेस्ट के लिए किट की भारी कमी
रिम्स जैसे राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में प्रसव से पहले जांच नहीं होती है। दरअसल सूत्रों की माने तो गायनेकोलॉजी विभाग में ऑपरेशन से पहले ब्लड टेस्ट नहीं हो पाते है क्योंकि जांच किट की भारी कमी है।ऑपरेशन थिएटर में जांच किट तक उपलब्ध नहीं होते है। 1 साल पहले की जांच रिपोर्ट के आधार पर भी ऑपरेशन हो जाता है। इस मामले में भी 6 महीने पहले की जांच रिपोर्ट के आधार पर ऑपरेशन हुआ था ।
रिम्स ने मरीज और सदर अस्पताल पर फोड़ा ठीकरा
रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ ने इस घटना के लिए मरीज के परिजनों और सदर अस्पताल को जिम्मेदार ठहराया है। उनका तर्क है कि सर्जरी सदर अस्पताल द्वारा जारी एक 'निगेटिव रिपोर्ट' के आधार पर की गई। हालांकि, विरोधाभास तब दिखा जब रिम्स की गायनी विभाग की एचओडी ने स्वीकार किया कि रिम्स की पर्ची पर बिना किसी साक्ष्य के मरीज को '3 वर्ष से पॉजिटिव' लिख दिया गया था, जबकि हकीकत में मरीज को दिसंबर 2025 में संक्रमण का पता चला था।
सदर अस्पताल का पलटवार
दूसरी ओर, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने रिम्स के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज सितंबर 2025 तक निगेटिव थी।23 दिसंबर 2025 को जांच के बाद उसके पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई और इलाज शुरू किया गया। रिम्स का यह दावा कि मरीज 3 साल से पॉजिटिव थी, पूरी तरह निराधार है। जबकि सदर अस्पताल में ही मरीज़ का इलाज किया जा रहा था ।
लापरवाही की सुई रिम्स की ओर
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल रिम्स की सर्जिकल प्रोटोकॉल पर है। नियमतः किसी भी बड़े ऑपरेशन से पहले अस्पताल को अपने स्तर पर रक्त जांच (Blood Test) अनिवार्य रूप से करनी चाहिए। रिम्स ने बिना ताजा जांच रिपोर्ट के, केवल पुरानी या बाहरी पर्ची के आधार पर ऑपरेशन कैसे कर दिया?
फिलहाल इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा उन दो जूनियर डॉक्टरों को भुगतना पड़ सकता है, जिन्होंने ऑपरेशन किया था। वे अब संक्रमण के सीधे खतरे (High Risk) में हैं। क्या यह केवल मरीज की जानकारी छिपाने का मामला है, या रिम्स जैसे बड़े संस्थान की अपनी व्यवस्थागत विफलता? इसकी उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।
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