On This Day 9th Jan: महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका से भारत आगमन, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नया मोड़
प्रवासी भारतीय दिवस ऐसे भारतीयों को समर्पित है, जो भारत में न रहकर भी भारतीय संस्कृति और संस्कारों को विदेश पटल पर ऊंचा रखने का काम कर रहे हैं. भारत के प्रति उनके योगदान को देखकर 9 जनवरी का दिन उन्हें समर्पित किया गया है. इस दिन से एक बेहद खास कड़ी भी जुड़ी हुई है, जिसका भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के साथ भी अहम जुड़ाव है.

On This Day 9th Jan: भारत से बाहर विदेशों में रहने वाले भारतीयों को मुख्य रूप से समर्पित है आज का दिन. वहीं महात्मा गांधी का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक बेहद अहम योगदान रहा है. जो दक्षिण अफ्रीका से भारत इसी दिन लौटकर आए थे. गांधी जी के भारत आगमन के बाद से बहुत से बदलाव देखे गए. इस मायने में 9 जनवरी को खास महत्व देते हुए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2003 से प्रवासी भारतीय दिवस मनाए जाने का फैसला लिया गया.
दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेजी सरकार को सत्य और अहिंसा के रास्ते मुहतोड़ जवाब देने के बाद महात्मा गांधी ने अपने देश भारत आने का फैसला लिया. गांधी जी के भारत लौटने के बाद स्वतंत्रता संग्राम में एक नया और जरूरी मोड़ देखने को मिला. उन्होंने 1915 से 1917 तक पूरे दो वर्ष भारत भ्रमण कर स्थिति को समझने का प्रयास किया. जिसके बाद उनकी खुद की मानसिकता पर भी तत्काल भारतीय स्थिति ने गहरी छाप छोड़ी.
गांधीजी के वापस आने के बाद क्या आए परिवर्तन?
गांधीजी को दो वर्ष भारत भ्रमण कर यह समझ आया कि पूरे भारत में लोग अंग्रेजी शासन से त्रस्त महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनका विरोध टुकड़ों में बंटा हुआ है. उन्हें एकता के साथ लड़ने का साहस व राह प्रदान करने का काम किया गांधी जी ने. गांधीजी के 1915 में भारत लौटने के बाद, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसक सत्याग्रह और असहयोग की नई दिशा आई, जिससे कांग्रेस में जन-आंदोलन शुरू हुआ और समाज सुधार (अस्पृश्यता उन्मूलन, हिंदू-मुस्लिम एकता) पर जोर दिया गया, जिससे आम लोगों की भागीदारी बढ़ी और खादी व स्वदेशी को बढ़ावा मिला, जिसने राष्ट्रवाद और स्वराज की भावना को मजबूत किया.









