नवजात के बदले 50 हजार रुपये की पेशकश? नवजात शिशु की कथित खरीद-फरोख्त का चौकने वाला मामला
सहरसा सदर अस्पताल में नवजात बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला को बच्चे के बदले 40 से 50 हजार रुपये देने की पेशकश की गई।


सहरसा: सदर अस्पताल सहरसा में नवजात शिशु की कथित खरीद-फरोख्त की कोशिश का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव वार्ड में भर्ती महिलाओं को बहला-फुसलाकर उनके नवजात बच्चों को खरीदने की कोशिश की जाती है। इस कथित नेटवर्क में अस्पताल के कुछ गार्ड, दलाल और आशा कार्यकर्ताओं की संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं।
बताया जा रहा है कि नवजात बच्चों के लिए 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की रकम की बात कही जाती है। बच्चों को अस्पताल से बाहर भेजे जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
प्रसव के बाद महिला को बच्चे के बदले पैसे देने की पेशकश का आरोप
मंगलवार को सौर बाजार क्षेत्र की एक महिला ने सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड में नवजात को जन्म दिया। आरोप है कि प्रसव के बाद ही अस्पताल के कुछ गार्ड समेत अन्य लोगों ने महिला से बच्चे को खरीदने को लेकर बातचीत शुरू कर दी।
महिला को बच्चे के बदले अलग-अलग रकम की पेशकश किए जाने का आरोप है। बताया गया कि किसी ने करीब 40 हजार तो किसी ने 50 हजार रुपये तक देने की बात कही। मामले की जानकारी अस्पताल चौकी प्रभारी को मिली तो महिला को समझाकर वापस वार्ड भेज दिया गया।
हालांकि, आरोप है कि अगले दिन फिर से गार्ड और एक आशा कार्यकर्ता ने महिला से करीब 50 हजार रुपये में नवजात को देने की बात कही। महिला ने बच्चे को देने से इनकार कर दिया।
मरीज के परिजनों ने दी गार्ड सुपरवाइजर को जानकारी
इसी दौरान बगल में इलाज करा रहे मरीज के परिजनों को कथित बातचीत की जानकारी मिली। उन्होंने मामले की सूचना अस्पताल के गार्ड सुपरवाइजर संजीव कुमार को दी। जानकारी मिलते ही सुपरवाइजर मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रशासन को मामले से अवगत कराया।
गार्ड सुपरवाइजर संजीव कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मामले की जानकारी सिविल सर्जन को भी दी गई है। फिलहाल संबंधित महिला ने अपने नवजात बच्चे को देने से साफ इनकार कर दिया है।
दलालों के जमावड़े का भी लगाया आरोप
अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल परिसर में लंबे समय से दलालों का जमावड़ा रहता है और मरीजों को अलग-अलग तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं। परिजनों का यह भी दावा है कि अस्पताल में पहले बच्चे बदले जाने का मामला सामने आ चुका है।
हालांकि, इन पुराने दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल परिसर में संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जाए तो ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकती है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
नवजात की कथित खरीद-फरोख्त की कोशिश के आरोपों के बाद अब अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर नजर है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि महिला से बच्चे के बदले पैसे की पेशकश किसने की, क्या वास्तव में किसी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी और नवजात को बाहर भेजने से संबंधित कोई नेटवर्क सक्रिय है या नहीं।
फिलहाल महिला और उसका नवजात सुरक्षित हैं। मामले में किसी व्यक्ति की भूमिका या आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

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