महागामा नगर पंचायत में चुनाव हारे, लेकिन नहीं हारी हिम्मत ! साइकिल पर फिर निकले अख़बार वाले दुर्गा सोरेन
चुनाव में हार भले की मिली हो, लेकिन दुर्गा का जज्बा आज भी कायम है. दुर्गा ने चुनाव में हार के बाद भी अपना पुराना काम नहीं छोड़ा और आज भी वो सुबह-सबेरे अपने साइकिल पर अखबार बांटने के लिए निकल पड़ते है.

Godda (Jharkhand): झारखंड नगर निकाय चुनाव के दौरान गोड्डा निवासी अखबार वाले दुर्गा सोरेन ने खूब सुर्खियां बटोरी थी. दुर्गा महागामा नगर पंचायत से नगर निकाय चुनाव के चुनावी मैदान में अपनी किस्मत अजमाने उतरे थे. लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वो भी मात्र 283 वोटों से...चुनाव में हार भले की मिली हो, लेकिन दुर्गा का जज्बा आज भी कायम है. दुर्गा ने चुनाव में हार के बाद भी अपना पुराना काम नहीं छोड़ा और आज भी वो सुबह-सबेरे अपने साइकिल पर अखबार बांटने के लिए निकल पड़ते है. और देश-दुनिया की ताजा अपडेट की जानकारी लोग जान सकें, इसके लिए वो उन तक अखबार पहुंचाते हुए नजर आते हैं. 
बता दें, महागामा नगर पंचायत में पहली बार चुनाव हुआ था जिसमें स्थानीय अख़बार विक्रेता दुर्गा सोरेन ने भी अपनी किस्मत आजमाई थी. चुनावी मैदान में उतरकर उन्होंने जनता के बीच अपनी पहचान बनाई, लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए और वे 283 वोट से चुनाव हार गए. हालांकि, हार के बाद भी दुर्गा सोरेन ने हिम्मत नहीं हारी. जहां आमतौर पर चुनाव हारने के बाद उम्मीदवारों का रुख बदल जाता है, वहीं दुर्गा सोरेन आज भी वही पुराना अंदाज… वही साइकिल… और उसी जुनून के साथ हर सुबह घर-घर अख़बार पहुंचाते नजर आते हैं.
उनका कहना है कि जनता ने उन्हें जो प्यार और सम्मान दिया, वह उनके लिए किसी जीत से कम नहीं है. उन्होंने कहा, मैं चुनाव जरूर हार गया, लेकिन लोगों का विश्वास नहीं हारा. मेरा काम अख़बार पहुंचाना है और मैं इसे कभी नहीं छोड़ूंगा. उनकी यह सादगी और संघर्ष लोगों के दिल में खास जगह बना रही है.इलाके में अब चर्चा है कि हारकर भी जीतने वाला उम्मीदवार कैसा होता है तो लोग दुर्गा सोरेन का नाम लेते हैं. सियासत में जहां जीत-हार आम बात है, वहीं दुर्गा सोरेन ने यह साबित कर दिया कि असली नेता वही है जो हर हाल में जनता के बीच खड़ा रहें.
रिपोर्ट - प्रिंस यादव गोड्डा
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