26 लाख के इनामी नक्सलियों का सरेंडर!, AK-47 के साथ RCM कमांडर ने पत्नी समेत डाले हथियार
पश्चिम बंगाल में लाल आतंक के खिलाफ चल रहे सुरक्षा बलों के चौतरफा अभियान को बहुत बड़ी कामयाबी मिली है।

New Delhi: पश्चिम बंगाल में लाल आतंक के खिलाफ चल रहे सुरक्षा बलों के चौतरफा अभियान को बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। माओवादी संगठन के तीन बेहद सक्रिय और मोस्ट वॉन्टेड नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने अपने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया है। इन तीनों के मुख्यधारा में लौटने से संगठन की रीढ़ पूरी तरह टूट गई है। सरेंडर करने वालों में पूर्वी सिंहभूम के पटमदा का रहने वाला खूंखार नक्सली राम प्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी मीता उर्फ नयनतारा और महिला कैडर बुलू उर्फ गौरी शामिल हैं।
26 लाख के इनामी पति-पत्नी ने डाले हथियार
आत्मसमर्पण करने वाले इन तीनों नक्सलियों पर सरकार की तरफ से कुल 26 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित था। इनमें राम प्रसाद मार्डी संगठन के अंदर आरसीएम के बड़े ओहदे पर सक्रिय था और उस पर अकेले 15 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। राम प्रसाद ने सरेंडर के दौरान घातक AK-47 राइफल और जिंदा कारतूस भी पुलिस को सौंपे हैं। वहीं उसकी पत्नी मीता उर्फ नयनतारा संगठन में जेडसीएम रैंक की कमांडर थी और उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम था। मीता मूल रूप से पश्चिम मेदिनीपुर के नंदीग्राम थाना क्षेत्र स्थित सोनाचूड़ा की रहने वाली है।
1 लाख की इनामी महिला कैडर भी मुख्यधारा में शामिल
इन दोनों बड़े कमांडरों के अलावा पश्चिम मेदिनीपुर के सालबनी थाना क्षेत्र के करमसोल की रहने वाली बुलू उर्फ गौरी ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। बुलू मदन महतो की पत्नी है और संगठन के लिए लंबे समय से ग्राउंड कैडर के रूप में काम कर रही थी। उस पर प्रशासन की ओर से एक लाख रुपये का नकद इनाम घोषित था। सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव और संगठन के घटते जनाधार को देखते हुए उसने भी अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।
सरकार की पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ
सुरक्षा बलों के अधिकारियों का कहना है कि तीनों नक्सलियों का सरेंडर करना संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, खासकर तब जब आरसीएम और जेडसीएम जैसे शीर्ष स्तर के नेता खुद हथियार डाल रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन तीनों पूर्व नक्सलियों को सरकार की तय आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सभी सरकारी योजनाओं, आर्थिक सहायता और पुनर्वास सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा। अधिकारियों ने जंगलों में छिपे बाकी नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा और खून-खराबे का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं।

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