जमीन गई, जमाबंदी भी रद्द… लेकिन मुआवजा कहां है? किसानों के पक्ष में उतरे JDU MLC
वाटर पार्क निर्माण से प्रभावित किसानों ने अपनी जमीन की जमाबंदी रद्द किए जाने और मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत JDU MLC खालिद अनवर से की। किसानों के दस्तावेज देखने के बाद उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।


बिहार में एक ओर सरकार लगातार विकास कार्यों को गति देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के ही विधान पार्षद ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला वाटर पार्क निर्माण से जुड़ी किसानों की जमीन की जमाबंदी रद्द किए जाने का है। वाटर पार्क निर्माण से प्रभावित किसानों ने जेडीयू के कद्दावर नेता और विधान पार्षद खालिद अनवर से मुलाकात कर अपने जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाए और अपनी समस्या से अवगत कराया। किसानों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने उनकी जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी, जबकि उन्हें अब तक मुआवजा भी नहीं दिया गया है।
किसानों के कागज देख बोले खालिद अनवर
किसानों से मुलाकात के बाद विधान पार्षद खालिद अनवर ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से किसानों की जमाबंदी जल्दबाजी में रद्द की गई, वह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसानों के कागजात देखे हैं और प्रथम दृष्टया उनमें कोई त्रुटि नजर नहीं आ रही है।
खालिद अनवर ने कहा कि फरवरी में किसानों की जमाबंदी रद्द कर दी गई, लेकिन जमीन का मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और इस मामले में पार्टी स्तर पर भी पहल की जाएगी।
जमीन गई तो मुआवजा कब मिलेगा?
विधान पार्षद ने स्पष्ट किया कि अगर किसानों के कागजात सही हैं और उन्हें मुआवजा भी नहीं दिया गया है, तो ऐसी स्थिति में उनकी जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब बड़ा सवाल यह है कि विकास परियोजना के नाम पर किसानों की जमीन की जमाबंदी रद्द करने की प्रशासनिक कार्रवाई कितनी उचित थी और प्रभावित किसानों को उनका हक और मुआवजा कब मिलेगा?
(प्रतीक कुमार की रिपोर्ट)

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