Delhi News: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के नाम को अपने उत्तराधिकारी के रुप में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने केंद्र सरकार से सिफारिश की है.
दरअसल, CJI बी. आर. गवई 23 नवंबर 2025 को 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद अपने पद से मुक्त होने वाले है. यानी इस दिन उनके कार्यकाल का आखिरी दिन है. ऐसे में भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश होंगे सूर्यकांत
भारत सरकार की मंजूरी के बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बनेंगे. उनका कार्यकाल साल 2027 में 9 फरवरी को समाप्त होगा. यानी वे करीब 14 महीने तक अपनी कार्यकाल संभालेंगे. न्यायमूर्ति सूर्यकांत हरियाणा के रहने वाले हैं और वे अपने संतुलित और संवेदनशील न्यायिक दृष्टिकोण के लिए काफी प्रसिद्ध हैं.
CJI गवई ने केंद्र के भेजा प्रस्ताव
बता दें, मुख्य न्यायाधीश गवई को पत्र लिखकर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने हाल ही में उनसे स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप देश के अगले मुख्य न्यायाधीश के लिए सिफारिश मांगी थी. भारत के CJI यानी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया ज्ञापन (MOP) की ओर से नियंत्रित होती है जो देश के सर्वोच्चतम न्यायालय (Supreme Court), उच्च न्यायालय (High Court) में न्यायाधीशों का स्थानांतरण, नियुक्ति और पदोन्नति की रूपरेखा तैयार करता है. प्रक्रिया ज्ञापन (MOP) के मुताबिक, सर्वोच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठतम न्यायाधीश को CJI पद के लिए उपयुक्त माना जाता है और उन्हें अगले मुख्य न्यायाधीश के रुप में अनुशंसित किया जाता है.
इस परंपरा के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बी. आर. गवई के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत है ऐसे में इनके नाम को शीर्ष न्यायिक पद के लिए अनुशंसित किया गया है. राष्ट्रपति की तरफ से औपचारिक नियुक्ति के बाद न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर, 2025 को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे. वे 9 फरवरी, 2027 ( करीब 14 महीने का) को अपना कार्यकाल पूरा करेंगे.
जानें, कौन हैं न्यायमूर्ति सूर्यकांत
न्यायमूर्ति सूर्यकांत का हरियाणा के हिसार जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले है जिनका जन्म 10 फरवरी 1962 को हुआ था. परिवार कानूनी पृष्ठभूमि से नहीं था, पिता एक साधारण सरकारी शिक्षक थे. सूर्यकांत ने गांव के ही सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा की शुरूआत की थी इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक से 1984 में कानून की डिग्री (LLB) हासिल की.







