JPSC SCAM! : ऑफिस में घुसकर पेन ड्राइव से डेटा चुरा रहे थे पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते!, CID की जांच में चौंकाने वाला खुलासा
JPSC परीक्षा में हुई धांधली का मामला अब एक बेहद ही सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया है।


JPSC SCAM: JPSC परीक्षा में हुई धांधली का मामला अब एक बेहद ही सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया है। CID की तगड़ी जांच में JPSC के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल ख्यांग्ते को लेकर कई ऐसे राज खुले हैं, जिसने सबको हैरान कर दिया है। जांच में पता चला है कि घोटाले की परतें खुलने के डर से ख्यांग्ते ने सबूत मिटाने की पूरी साजिश रची थी। उन्होंने बाकायदा ऑफिस के कंप्यूटर से अहम डेटा डिलीट करने और उसे गायब करने का प्रयास किया था।
छापेमारी के बाद पेन ड्राइव में डेटा लेकर भागने की थी प्लानिंग
CID की जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि जब JPSC ऑफिस में छापेमारी हुई थी, तो उसके बाद ख्यांग्ते गुपचुप तरीके से अपने दफ्तर पहुंचे थे। उनका असली मकसद कंप्यूटर में मौजूद सारे राज दफन करना था। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक पेन ड्राइव के जरिए परीक्षा से जुड़ा बेहद अहम डेटा अपने साथ ले जाने की कोशिश की। इसके अलावा वे अपने साथ कुछ जरूरी और गुप्त दस्तावेज भी ले गए थे। लेकिन CID की पैनी नजरों से वो बच नहीं सके। मामले की भनक लगते ही CID ने तुरंत उनके घर पर धावा बोल दिया, जहां से जांच से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद कर लिए गए।
लगातार नोटिस के बाद हुई गिरफ्तारी और पहुंचे जेल
घर से सबूत मिलने के बाद CID ने एल ख्यांग्ते पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया। जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए उन्हें एक के बाद एक कई नोटिस भेजे। जब उनसे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उनके बयानों और बरामद किए गए डिजिटल सबूतों में घालमेल सामने आ गया। इसके बाद बिना कोई देर किए जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ सख्त कानूनी एक्शन लिया और आखिरकार उन्हें गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया गया।
कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र ने कराई थी प्राइवेट एजेंसी से सेटिंग
इस पूरे काले खेल में सिर्फ बड़े अधिकारी ही नहीं, बल्कि JPSC का एक कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार पासवान भी मास्टरमाइंड निकला। CID की जांच के मुताबिक, धर्मेंद्र की सीधी पहुंच परीक्षा का संचालन करने वाली प्राइवेट एजेंसी TDPL के लोगों तक थी। इसी ऑपरेटर ने एजेंसी के दलालों की सीधी मुलाकात तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल ख्यांग्ते से करवाई थी। इसके बाद ही परीक्षा के कामकाज को मैनेज करने और पैसों के बड़े लेन-देन की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की गई।
बचने के लिए लगाया एड़ी-चोटी का जोर, अब नेटवर्क खंगाल रही CID
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जब धर्मेंद्र को अपनी गिरफ्तारी का डर सताने लगा, तो उसने खुद को बचाने के लिए अपने रसूख और बड़े संपर्कों का खूब इस्तेमाल किया। लेकिन कानून के हाथ उस तक पहुंच ही गए। अब CID इस ऑपरेटर के संपर्क में आए तमाम लोगों और इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है। फिलहाल, CID बरामद किए गए डिजिटल डेटा, घर से मिले कागजात और पूछताछ से निकले सुरागों की कड़ियां जोड़ रही है, ताकि इस महाघोटाले में शामिल बाकी चेहरों को भी जल्द से जल्द बेनकाब किया जा सके।

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