रांची डोरंडा थाना केस में हाईकोर्ट का अहम फैसला, अदालत ने कहा- नहीं बनता अपराध!
रांची के डोरंडा थाना केस में झारखंड हाईकोर्ट ने फ्लिपकार्ट से जुड़े दो कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि IPC की धारा 406 और 420 के तहत अपराध नहीं बनता।

Jharkhand High Court : झारखंड हाईकोर्ट ने फ्लिपकार्ट से जुड़े दो कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को निरस्त कर दिया है। जस्टिस अनिल चौधरी की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ न तो किसी संपत्ति के सुपुर्द किए जाने का कोई ठोस आरोप है और न ही शिकायतकर्ता को धोखे में रखकर संपत्ति देने के लिए प्रेरित करने का कोई साक्ष्य। ऐसे में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है।
डोरंडा थाने में दर्ज प्राथमिकी को दी गई थी चुनौती
यह मामला राजधानी रांची के डोरंडा थाने में दर्ज प्राथमिकी और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान आदेश से जुड़ा था। मामले में ई-कार्ट लॉजिस्टिक्स के हरमू हब प्रभारी मनीष कुमार और फ्लिपकार्ट की सिक्योरिटी टीम के मैनेजर चंदन कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया था। शिकायतकर्ता लालजीत प्रसाद सिन्हा ने दोनों के खिलाफ डोरंडा थाने में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत का संज्ञान आदेश किया निरस्त
निचली अदालत के आदेश और प्राथमिकी के खिलाफ मनीष कुमार और चंदन कुमार ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे रद्द करने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी पहलुओं का विश्लेषण करने के बाद पाया कि मामले के तथ्य 406 और 420 के कानूनी दायरे में नहीं आते हैं। इसके बाद अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए दोनों कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और निचली अदालत के संज्ञान आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
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