'मैं किसी पार्टी से नहीं, स्टूडेंट हूँ!', अल्बर्ट एक्का चौक पर मारपीट के बाद छलका छात्रा प्रतिमा कुमारी का दर्द
राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर JPSC और JSSC नियुक्ति विवाद को लेकर आयोजित मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसक झड़प में पीड़ित छात्रा प्रतिमा कुमारी का दर्द और गुस्सा सामने आया है।

Ranchi: राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर JPSC और JSSC नियुक्ति विवाद को लेकर आयोजित मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसक झड़प में पीड़ित छात्रा प्रतिमा कुमारी का दर्द और गुस्सा सामने आया है। प्रतिमा कुमारी ने आरोप लगाया है कि जब वह शांतिपूर्ण तरीके से पुतला लेकर आगे बढ़ रही थीं, तभी सत्ताधारी दल JMM के कुछ कथित कार्यकर्ताओं ने उनके साथ खुलेआम बदसलूकी, मारपीट और धक्का-मुक्की की। छात्रा ने भावुक होते हुए कहा कि बीच सड़क पर उनका दुपट्टा खींचा गया और अगर आसपास अन्य छात्र मौजूद नहीं होते, तो उनके साथ कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
पुलिस के सामने होती रही बदसलूकी, मूकदर्शक बना रहा प्रशासन
पीड़िता ने घटना की आंखों देखी बयां करते हुए पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रतिमा का कहना है कि जिस वक्त यह पूरी घटना घट रही थी, उस समय मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था, लेकिन किसी ने भी आगे आकर बीच-बचाव करने या उसे बचाने की कोशिश नहीं की। छात्रा ने सवाल उठाया कि जब दिनदहाड़े शहर के मुख्य चौराहे पर पुलिस की आंखों के सामने छात्राओं पर हाथ उठाया जा रहा है, तो फिर आम नागरिक और बेटियां राज्य में खुद को कैसे सुरक्षित महसूस कर सकती हैं।
मंईयां योजना पर उठाए सवाल, कहा- किस सम्मान की बात करते हैं CM
प्रतिमा कुमारी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सरकार मंईयां योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक मदद देने और बेटियों के सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन हकीकत में सड़कों पर बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। छात्रा ने कहा कि ऐसे किसी सम्मान या योजना का क्या फायदा, जब सरकार की ही पार्टी के लोग सड़क पर उतरकर छात्राओं के साथ मारपीट और बदसलूकी करें। उसने मांग की कि वीडियो फुटेज देखकर हमलावरों की पहचान की जाए और उन पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
परिवार में दहशत का माहौल, पढ़ाई छूटने का सता रहा डर
घटना के बाद से पीड़ित छात्रा और उसके परिजन गहरे सदमे और खौफ में हैं। प्रतिमा ने बताया कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ी हुई नहीं है, बल्कि एक साधारण छात्रा है जो अपने अधिकारों और छात्रहित के लिए आवाज उठा रही थी। इस घटना के बाद से घरवाले बुरी तरह डर गए हैं और उसे पढ़ाई छोड़कर तुरंत घर वापस लौटने का दबाव बना रहे हैं। छात्रा ने व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ प्रशासन लाठीचार्ज करता है और दूसरी तरफ शासन के लोग पीटते हैं, ऐसे हालात में गरीब छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर आखिर कहाँ जाएं।

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