Hazaribagh Breaking: हजारीबाग हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा, अंधविश्वास की आड़ में बच्ची के साथ वहसियत!
हजारीबाग दुष्कर्म और हत्याकांड का पुलिस ने कथित रूप से खुलासा कर दिया है. तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस का कहना है कि बच्ची की अंधविश्वास में पड़कर बलि दी गई थी.

Hazaribagh Breaking: हजारीबाग के विष्णुगढ़ में हुए दुष्कर्म और रेप मामले का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. जिला एसपी अंजनी अंजन द्वारा प्रेसवार्ता कर मामले की सारी जानकारी दी गई. उन्होंने बताया कि बच्ची की जान अंधविश्वास में पड़कर ली गई. वह अमानवीय कृत्य सिर्फ इसलिए किया गया, क्योंकि लड़की के भाई का इलाज करने की खातिर गांव की ही ओझा मति करने वाली महिला द्वारा किसी कुवांरी लड़की की बलि देने का उपाय बताया गया था.
हत्या को अलग मोड़ देने की हुई कोशिश
बताया गया कि 25 मार्च 2026 की सुबह लगभग 8:30 बजे विष्णुगढ़ थाना को सूचना मिली कि कुसुम्बा गांव स्थित मिडिल स्कूल के पीछे बांस झाड़ी के पास एक बच्ची का शव पड़ा हुआ है. जांच में पता चला कि बच्ची 24 मार्च की रात मंगल जुलूस के दौरान लापता हो गई थी.
मामले में बच्ची की मां रेशमी देवी के लिखित आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई. घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एसआईटी टीम का गठन किया गया, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर पूरे मामले का खुलासा किया.
क्या है पूरा मामला?
बताते चलें कि शुरुआत में उक्त मामले को बलात्कार और हत्या बताया जा रहा था. पुलिस द्वारा बताए अनुसार बच्ची की हत्या उसकी अपनी मां ने बलि देने की खातिर कराई. भीमा राम नाम के व्यक्ति को परिवार का बेहद करीबी बताया जा रहा है. जिसने इस हत्याकांड में मुख्य भूमिका निभाई. भगतिनी के बताए अनुसार बच्ची की बलि एक पुरुष द्वारा दी जानी जरूरी थी. जिसमें भीमा राम की मदद ली गई. एसपी ने बताया कि यह सारा कृत्य महज इसलिए किया गया क्योंकि बच्ची का भाई, जो मानसिक रूप से विक्षिप्त है, उसे ठीक किया जा सके.
मां ही निकली कातिल
जांच में सामने आया कि गांव की शांति देवी उर्फ भगतिनी (55 वर्ष) तंत्र-मंत्र करती थी. उसने रेशमी देवी को यह विश्वास दिलाया कि उसके बेटे की शारीरिक और मानसिक समस्या को ठीक करने के लिए एक कुंवारी लड़की की बलि देना आवश्यक है. इसके लिए रेशमी देवी को अपनी ही बेटी की बलि देने के लिए तैयार किया गया.
24 मार्च की शाम मंगल जुलूस के दौरान रेशमी देवी अपनी बेटी को लेकर भगतिनी के घर पहुंची. वहां पहले पूजा-पाठ किया गया और फिर रात करीब 9:30 बजे बच्ची को बांसबाड़ी में ले जाया गया.
कैसे दिया गया वारदात को अंजाम?
बांसबाड़ी में बच्ची को जमीन पर लिटाया गया. इसके बाद आरोपी भीम राम (45 वर्ष) ने बच्ची का गला घोंट दिया, जबकि उसकी मां रेशमी देवी ने उसके हाथ-पैर पकड़े रखा. बच्ची की मौत के बाद भी आरोपियों की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी-
शव के साथ अमानवीय कृत्य किए गए
सिर पर पत्थर से वार कर उसे क्षत-विक्षत किया गया, फिर खून से तंत्र-मंत्र की पूजा की गई और इस पूरी घटना को तंत्र साधना और अंधविश्वास के नाम पर अंजाम दिया गया.
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी भीमा राम (45), मृतका की मां रेशमी देवी (35) और भगतिनी शांति देवी (55) को गिरफ्तार किया गया है. तीनों आरोपी कुसुम्बा गांव, थाना विष्णुगढ़, जिला हजारीबाग के ही निवासी हैं.
पुलिस की कार्रवाई
एसआईटी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी साक्ष्य, पूछताछ और स्थानीय जानकारी के आधार पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इस टीम में कई पुलिस पदाधिकारी और तकनीकी शाखा के सदस्य शामिल थे.
फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
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