मरीजों के लिए गुड न्यूज!, RIMS में एडमिशन-डिस्चार्ज के बदलेंगे नियम, मेडिकल सीटों में...
RIMS रांची में UG, PG और पोस्ट PG मेडिकल सीटें बढ़ाने की तैयारी है। मरीजों के एडमिशन-डिस्चार्ज के लिए नई SOP बनेगी और अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर करीब 830 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

Ranchi: राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान यानी RIMS में जल्द ही सब कुछ बदलने वाला है। अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुधारने और मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए राज्य सरकार बड़े कदम उठा रही है। बुधवार को नेपाल हाउस में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक बड़ी समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में मेडिकल सीटों को बढ़ाने, बुनियादी ढांचे का विकास करने और मरीजों के एडमिशन-डिस्चार्ज के नियमों में बदलाव को लेकर कई अहम फैसले लिए गए।
मेडिकल सीटों में बंपर इजाफे की तैयारी
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि RIMS में मेडिकल सीटों को बढ़ाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जा रही है। नेशनल मेडिकल कमीशन यानी NMC ने कुछ शर्तों के साथ इसके लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी है। नई तैयारी के तहत RIMS में UG की सीटें वर्तमान 180 से बढ़ाकर 250 कर दी जाएंगी। इसके अलावा PG सीटों को 176 से बढ़ाकर 275 और पोस्ट PG सीटों को 11 से सीधे 100 करने का लक्ष्य रखा गया है।
अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे करीब 830 करोड़
सीटों में बढ़ोतरी के हिसाब से अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी पूरी तरह से अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए दो अलग-अलग मदों में बजट की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम के तहत करीब 380 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे RIMS के पुराने IPD, OPD, एकेडमिक ब्लॉक और नॉर्थ-साउथ कैंपस स्थित हॉस्टल एवं क्वार्टर का रेनोवेशन किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, अस्पताल परिसर में PG एवं पोस्ट PG हॉस्टल और स्टेडियम कॉम्प्लेक्स के विकास का प्रस्ताव PPP मोड पर तैयार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
मरीजों के एडमिशन और डिस्चार्ज के लिए बनेगी नई SOP
बैठक में मरीजों की सुविधा और बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। अब मरीजों के एडमिशन और डिस्चार्ज के लिए एक स्पष्ट SOP तैयार की जाएगी। इलाज पूरा होने के बाद डॉक्टर की सलाह पर मरीजों को समय से डिस्चार्ज किया जाएगा, ताकि गंभीर मरीजों के लिए बेड खाली मिल सकें। इसके साथ ही, बिना रेफरल वाले मरीजों की बेवजह भर्ती को नियंत्रित किया जाएगा और केवल बेहद जरूरी मामलों में ही उन्हें भर्ती किया जाएगा।
2014 की RIMS नियमावली में होगा बदलाव
बदलते समय और मौजूदा जरूरतों को देखते हुए साल 2014 की RIMS नियमावली को भी बदलने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा अस्पताल में स्वीकृत और कार्यरत पदों के स्ट्रक्चर की भी विस्तार से समीक्षा की जाएगी। इस अहम बैठक में अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, RIMS के कार्यकारी निदेशक डॉ. डीके सिन्हा और सहायक निदेशक बाघमारे प्रसाद कृष्ण समेत स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
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