'अपने धाम जाओ...', पारसनाथ टोंक पर शिव के जयकारे सुनते ही क्यों आपा खो बैठी जैन महिला श्रद्धालु?
झारखंड के गिरिडीह स्थित जैन धर्म के सबसे बड़े और पवित्र तीर्थस्थल सम्मेद शिखर मधुबन में एक बार फिर से धार्मिक आस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।


Giridih: झारखंड के गिरिडीह स्थित जैन धर्म के सबसे बड़े और पवित्र तीर्थस्थल सम्मेद शिखर मधुबन में एक बार फिर से धार्मिक आस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यहां दूसरे राज्यों से आए जैन तीर्थयात्रियों और गैर-जैन श्रद्धालुओं के बीच उस वक्त नोकझोंक हो गई, जब मंदिर परिसर में भगवान शिव के जयकारे लगने लगे। हालांकि, बाद में आपसी समझदारी से मामले को शांत करा लिया गया।
मोक्ष सप्तमी को लेकर उमड़ी है श्रद्धालुओं की भारी भीड़
दरअसल, आने वाले कुछ ही दिनों में जैन समाज का बहुत ही पवित्र 'मोक्ष सप्तमी' पर्व शुरू होने वाला है। इस खास मौके को लेकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु दर्शन के लिए मधुबन पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में श्रद्धालुओं का एक बड़ा समूह पारसनाथ पहाड़ पर स्थित भगवान पार्श्वनाथ टोंक पर दर्शन के लिए गया हुआ था। वहीं दूसरी तरफ, कुछ गैर-जैन श्रद्धालुओं की भीड़ भी दर्शन करने के लिए पहाड़ पर ऊपर पहुंच गई और यहीं से सारा विवाद शुरू हुआ।
मंदिर में शिव के जयकारे लगने पर भड़का गुस्सा
विवाद की असली शुरुआत तब हुई जब गैर-जैन श्रद्धालुओं की यह टोली भगवान पार्श्वनाथ टोंक के मंदिर में घुसी और वहां जोर-जोर से भगवान शिव के जयकारे लगाने लगी। जैन धर्म के इस पवित्र टोंक पर शिव के नारे गूंजते देख वहां मौजूद जैन तीर्थयात्रियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। माहौल तब और गरमा गया जब भीड़ में मौजूद एक महिला जैन श्रद्धालु अपना आपा खो बैठी और उसने जयकारे लगा रहे लोगों को जमकर खरी-खोटी सुना दी।
'क्या पार्श्वनाथ मंदिर में भगवान शिव हैं?'
गुस्से में तमतमाई महिला श्रद्धालु ने गैर-जैन तीर्थयात्रियों से साफ शब्दों में कह दिया कि वे लोग अपने तीर्थस्थल पर जाएं और वहीं जाकर भगवान शिव की आराधना करें। महिला ने सवाल दागते हुए कहा कि क्या पार्श्वनाथ मंदिर में भगवान शिव बैठे हैं, जो यहां उनके नाम के नारे लगाए जा रहे हैं? इस तीखी बहस के कारण वहां कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया और दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए।
आपसी समझदारी और सूझबूझ से टल गया बड़ा विवाद
गनीमत यह रही कि यह विवाद ज्यादा आगे नहीं बढ़ा। जब बात बिगड़ती हुई दिखी, तो दोनों तरफ के समझदार लोगों ने बीच-बचाव किया और एक-दूसरे को शांत कराने की कोशिश की। गैर-जैन तीर्थयात्रियों की टोली ने भी स्थिति की नजाकत को समझा और गुस्से में आई महिला श्रद्धालु को शांत कराया। आपसी बातचीत के बाद गैर-जैन समूह ने कहा कि वे लोग वहां से जा रहे हैं, जिसके बाद यह पूरा विवाद बिना किसी बड़े हंगामे के वहीं पर खत्म हो गया।

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