मिट्टी डालकर निगल गए चार-चार सरकारी तालाब!, पाकुड़ के बलरामपुर में भू-माफिया का खेल, बना लिए मकान
पाकुड़ के बलरामपुर गांव में चार से अधिक सरकारी तालाबों पर अतिक्रमण का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने तालाबों की मापी, कब्जामुक्त कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Pakur: पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत बलरामपुर गांव में सरकारी तालाबों पर बेधड़क अतिक्रमण और अवैध कब्जे का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव में स्थित एक-दो नहीं, बल्कि चार से अधिक बड़े सरकारी तालाबों पर स्थानीय लोगों ने अवैध रूप से कब्जा जमा लिया है। कई बीघा के विशाल भूभाग में फैले इन तालाबों में योजनाबद्ध तरीके से मिट्टी भरकर उन्हें पाटा जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, आपसी मिलीभगत के जरिए तालाबों को भरने के बाद उनकी जमीन पर पक्के और कच्चे मकान तक बना लिए गए हैं। यह न केवल सरकारी संपत्ति पर कब्जा है, बल्कि गांव की पारंपरिक जल व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा संकट बन चुका है।
खेती, पशुपालन और रोजमर्रा की जरूरतों पर गहराया संकट
सरकारी तालाबों के तेजी से खत्म होने के कारण गांव में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। इसके साथ ही मवेशियों के पीने के पानी और चारे की भारी किल्लत पैदा हो गई है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन ऐतिहासिक तालाबों के पानी से कभी खेती, पशुपालन और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती थीं, वे आज अतिक्रमण की वजह से लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं।
सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जमीन की मापी और कार्रवाई की मांग
गांव के जलस्रोतों पर संकट गहराता देख स्थानीय ग्रामीणों ने जिला एवं प्रखंड प्रशासन से मामले में तत्काल जांच की मांग उठाई है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर स्थल जांच करे और अंचल के सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर तालाबों की जमीन की सही मापी (पैमाइश) कराए। ग्रामीणों ने स्पष्ट मांग रखी है कि अतिक्रमण की पुष्टि होते ही सरकारी जमीन को फौरन कब्जामुक्त कराया जाए और अवैध कब्जा करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
समय रहते नहीं चेता प्रशासन तो खत्म हो जाएंगे बचे जलस्रोत
ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर समस्या पर कड़ा एक्शन नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में गांव के बचे-खुचे प्राकृतिक जलस्रोत भी पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाएंगे। अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की इस लिखित शिकायत पर प्रशासन कब जांच शुरू करता है और सरकारी तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
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