पहले जमीन और पक्का घर दो, फिर खाली करेंगे मकान’, घर टूटने का डर, डीएम ऑफिस पहुंचे महादलित परिवार
नालंदा के जियार गांव में करीब 200 महादलित परिवारों को घर खाली करने का नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने पहले 5 डिसमिल जमीन और पक्का मकान उपलब्ध कराने की मांग की है।


नालंदा: अस्थावां प्रखंड के जियार गांव में करीब 200 महादलित परिवारों को घर खाली करने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। नोटिस के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण बिहारशरीफ स्थित जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि उन्हें वैकल्पिक जमीन और आवास उपलब्ध कराए बिना घर खाली नहीं कराया जाए।
वर्षों से रह रहे परिवारों ने जताया विरोध
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से जियार गांव में संबंधित जमीन पर घर बनाकर रह रहे हैं और यहीं अपने परिवार के साथ जीवन-यापन कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अचानक घर खाली करने का नोटिस मिलने से उनके सामने आशियाना बचाने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से उन्हें हटाया जाता है तो उनके परिवारों के सामने रहने की समस्या पैदा हो जाएगी। इसी वजह से वे अपनी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे।
‘पहले 5 डिसमिल जमीन दो, फिर खाली करेंगे घर’
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और जिला प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी कि उन्हें पहले 5 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही इंदिरा आवास योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनके रहने के लिए वैकल्पिक जमीन और मकान की व्यवस्था नहीं होती, तब तक वे अपने मौजूदा घर खाली नहीं करेंगे।
महादलित परिवारों के समर्थन में दलित नेता गोल्डन दास भी जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी से मुलाकात कर ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों से अवगत कराया। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि प्रभावित परिवारों की स्थिति को देखते हुए संवेदनशीलता के साथ मामले का समाधान किया जाए और किसी भी कार्रवाई से पहले उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
डीएम ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मामले को लेकर जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि महादलित परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकारी योजनाओं और निर्धारित नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नोटिस के बाद आगे की प्रशासनिक कार्रवाई किस रूप में होगी और ग्रामीणों की वैकल्पिक जमीन एवं आवास की मांग पर क्या निर्णय लिया जाएगा।
जियार गांव के करीब 200 परिवारों से जुड़ा यह मामला अब जिला स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ प्रशासनिक स्तर पर अवैध निर्माण को लेकर जारी नोटिस का मामला है, तो दूसरी ओर ग्रामीण वर्षों से अपने निवास और पुनर्वास की मांग को लेकर सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अचानक बेघर करने के बजाय पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों और नियमों के बीच किस तरह समाधान निकालता है।
(नालंदा से वीरेंद्र कुमार की रिपोर्ट)

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