सामने पिता की प्रतिमा... पीछे खामोश खड़े हेमंत सोरेन, एक तस्वीर ने बयां कर दी विरासत, संघर्ष और संकल्प की कहानी
कभी-कभी एक तस्वीर हजारों शब्दों से ज्यादा बोलती है। एसे ही एक तस्वीर सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है। तस्वीर में सामने झारखंड आंदोलन के महानायक और पद्म भूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा है, जबकि ठीक पीछे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शांत भाव से खड़े दिखाई दे रहे हैं।

कभी-कभी एक तस्वीर हजारों शब्दों से ज्यादा बोलती है। रामगढ़ के नेमरा से सामने आई ऐसी ही एक तस्वीर सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है। तस्वीर में सामने झारखंड आंदोलन के महानायक और पद्म भूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा है, जबकि ठीक पीछे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शांत भाव से खड़े दिखाई दे रहे हैं। हेमंत सोरेन की आंखें प्रतिमा की ओर टिकी हैं। चेहरे पर न कोई राजनीतिक आक्रामकता है और न ही कोई औपचारिक मुस्कान। इस एक पल में मानो पिता के संघर्ष, आंदोलन की विरासत और झारखंड के भविष्य को लेकर उनके संकल्प की पूरी कहानी सिमट गई हो। गोड्डा में बायोडायवर्सिटी पार्क का नाम बदलकर 'दिशोम गुरु शिबू सोरेन बायोडायवर्सिटी पार्क' रखा गया और उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। नेमरा गांव के कार्यक्रम की सबसे चर्चित तस्वीर वही रही, जिसमें पिता की प्रतिमा के पीछे खड़े पुत्र की खामोशी बहुत कुछ कहती नजर आई। समर्थकों का मानना है कि यह सिर्फ श्रद्धांजलि का क्षण नहीं, बल्कि दिशोम गुरु के बताए रास्ते पर चलते हुए समाज के हर वर्ग को साथ लेकर एक मजबूत, समृद्ध और न्यायपूर्ण झारखंड के निर्माण के संकल्प का प्रतीक है।
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