DM बने 'निक्षय मित्र', 100 टीबी मरीजों को मिला नया सहारा, जानिए क्या है पूरा अभियान
पूर्वी चंपारण में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत डीएम सौरभ सुमन यादव 'निक्षय मित्र' बने। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने 100 टीबी मरीजों को गोद लेकर छह महीने तक हर माह पोषण आहार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली।


पूर्वी चंपारण में टीबी मुक्त भारत अभियान को नई ऊर्जा देने के लिए जिला प्रशासन ने एक शानदार कदम उठाया है। जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने खुद 'निक्षय मित्र' बनकर पांच टीबी मरीजों को गोद लिया। इसके अलावा, जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भी इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए कुल 100 टीबी मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी ली। अब इन सभी मरीजों को अगले छह महीनों तक हर महीने पोषण सामग्री (फूड बास्केट) मुहैया कराई जाएगी। सदर अस्पताल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मरीजों को फूड बास्केट वितरित किए गए। इस पहल का मकसद केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों को बेहतर पोषण देकर उनकी रिकवरी को भी तेज करना है।
DM समेत कई अधिकारी बने 'निक्षय मित्र'
कार्यक्रम में जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव, अपर समाहर्ता, उप विकास आयुक्त और सिविल सर्जन ने पांच-पांच टीबी मरीजों को गोद लिया। इसके अलावा, अनुमंडल पदाधिकारियों ने तीन-तीन और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों ने दो-दो मरीजों की जिम्मेदारी ली। प्रशासन की इस पहल को मरीजों और उनके परिवारों ने एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा। जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य देश से तपेदिक जैसी गंभीर बीमारी को पूरी तरह से समाप्त करना है। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से भी अपील की कि वे आगे आएं और 'निक्षय मित्र' बनकर टीबी मरीजों के पोषण और देखभाल में मदद करें।
टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
कार्यक्रम के दौरान डीएम ने लोगों को टीबी के प्रति जागरूक भी किया। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, थूक में खून आना, तेजी से वजन घटना, शाम के समय बुखार या रात में अधिक पसीना आने जैसी समस्याएं हों, तो उसे तुरंत सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है। समय पर पहचान और नियमित इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
जिला प्रशासन का मानना है कि सरकारी प्रयासों के साथ यदि समाज भी इस अभियान में भागीदार बने, तो टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल किया जा सकता है। पूर्वी चंपारण में शुरू हुई यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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