पलामू में राजस्व संग्रहण और लंबित मामलों को लेकर उपायुक्त सख्त, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने समाहरणालय सभागार में विभिन्न विभागों के राजस्व संग्रहण और लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की।

Medininagar पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने समाहरणालय सभागार में विभिन्न विभागों के राजस्व संग्रहण और लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध राजस्व संग्रहण, अंतरविभागीय भूमि हस्तांतरण, आपदा प्रभावितों को सहायता राशि, ई-रेवेन्यू कोर्ट में लंबित मामले, नीलाम पत्र वाद, रिट पिटीशन तथा विभिन्न अंचलों में लंबित नामांतरण व अन्य आवेदनों की बिंदुवार समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि जनता के प्रति प्रशासन की जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर कार्यों में अनावश्यक देरी, लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को अपने विभाग के कोर वर्क को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया। खनन विभाग ने जुलाई तक जुटाया ₹57.54 करोड़ राजस्व समीक्षा के दौरान खनन विभाग, डाल्टनगंज के राजस्व संग्रहण की जानकारी ली गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध जुलाई 2026 तक विभाग द्वारा ₹57.54 करोड़ का राजस्व संग्रह किया गया है, जो वार्षिक लक्ष्य का 16.44 प्रतिशत है। अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज करने का निर्देश उत्पाद विभाग के राजस्व संग्रहण की समीक्षा में वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 34.66 प्रतिशत राजस्व संग्रहण पाया गया। उपायुक्त ने उत्पाद अधीक्षक को विशेष रूप से सीमा क्षेत्रों में सघन अभियान चलाने तथा दूसरे राज्यों से होने वाले शराब के अवैध आवागमन पर प्रभावी रोक लगाने का निर्देश दिया। उत्पाद अधीक्षक ने बताया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में जुलाई 2026 तक पलामू जिले में कुल 113 अभियोग दर्ज किए गए हैं और मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। निबंधन और GST संग्रहण की भी समीक्षा जिला अवर निबंधक कार्यालय, मेदिनीनगर ने वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध 40.36 प्रतिशत राजस्व संग्रहण किया है। वहीं जिला अवर निबंधक कार्यालय, हुसैनाबाद की उपलब्धि 24.35 प्रतिशत रही। राज्य कर संयुक्त आयुक्त कार्यालय के GST संग्रहण की समीक्षा में बताया गया कि ₹159.04 करोड़ के वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध जुलाई तक ₹54.18 करोड़ का राजस्व संग्रह किया जा चुका है।
मेदिनीनगर नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के ₹16.04 करोड़ के वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध ₹7.21 करोड़ राजस्व संग्रह किया है। वहीं परिवहन विभाग ने ₹85.59 करोड़ के वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध ₹29.16 करोड़ का राजस्व संग्रह किया है। विधिक माप विज्ञान विभाग की समीक्षा में जुलाई तक ₹21.52 लाख राजस्व संग्रह की जानकारी दी गई। उपायुक्त ने प्रभारी निरीक्षक को ब्रिज, ग्रोसरी, पेट्रोल पंप, LPG, हार्डवेयर, फर्टिलाइजर और PDS इकाइयों की क्रमवार जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विधिक माप विज्ञान से जुड़े कार्यों का नियमित एवं नियमानुसार प्रभावी ढंग से निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। नगर निकायों और बिजली विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नगर पंचायत हुसैनाबाद, नगर पंचायत छतरपुर, नगर पंचायत हरिहरगंज और नगर परिषद विश्रामपुर के राजस्व संग्रहण की स्थिति जुलाई तक लक्ष्य के अनुरूप संतोषजनक पाई गई। इसी तरह विद्युत प्रमंडल छतरपुर और डाल्टनगंज के राजस्व संग्रहण की स्थिति भी संतोषजनक रही। उपायुक्त ने बिजली विभाग के अधिकारियों को विभागीय नियमों के अनुसार बिजली से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। आपदा प्रभावितों को जल्द मिलेगी सहायता बैठक में प्राकृतिक आपदाओं और राज्य स्तरीय अधिसूचित आपदाओं से प्रभावित लोगों को सहायता राशि देने से जुड़े लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर मानव क्षति, पशु क्षति और मकान क्षति से प्रभावित लोगों एवं उनके आश्रितों को नियमानुसार मुआवजा और सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया। भूमि हस्तांतरण एक पक्ष के अंदर पूरा करने का निर्देश अंतरविभागीय भूमि हस्तांतरण की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित नोडल अधिकारियों से अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया एक पक्ष के अंदर पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भूमि हस्तांतरण में अनावश्यक देरी के कारण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा नहीं आनी चाहिए। लंबित नीलाम पत्र वादों पर भी सख्ती उपायुक्त ने अनुमंडल पदाधिकारियों और सक्षम अंचल अधिकारियों को लंबित नीलाम पत्र वादों की प्रक्रिया नियमानुसार एवं समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा। उन्होंने अपर समाहर्ता को सभी नीलाम पत्र पदाधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों का यथाशीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। ई-रेवेन्यू कोर्ट और नामांतरण मामलों में देरी पर नाराजगी ई-रेवेन्यू कोर्ट से प्राप्त कॉज लिस्ट और राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने मामलों के लंबित रहने पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राजस्व से जुड़े मामलों को किसी भी स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। विभिन्न अंचलों में लंबित नामांतरण वादों और अन्य आवेदनों की भी समीक्षा करते हुए नियमानुसार समयबद्ध निष्पादन का निर्देश दिया गया। रिट पिटीशन में समय पर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश उपायुक्त ने विभागीय अधिकारियों को रिट पिटीशन से जुड़े मामलों में समय पर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि काउंटर एफिडेविट दाखिल करने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। अनधिकृत लोगों के सरकारी कार्यालयों में आने-जाने पर सख्ती उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को अपने कोर वर्क को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि कार्यों में अनावश्यक लापरवाही या शिथिलता सामने आने पर संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की पहली जवाबदेही जनता के प्रति है। कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचता है तो उसकी बात को गंभीरता से सुना जाए और समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। उपायुक्त ने यह भी सख्त निर्देश दिया कि यदि किसी अंचल, प्रखंड या अन्य सरकारी कार्यालय में अनधिकृत व्यक्तियों का अनावश्यक आना-जाना पाया जाता है, तो संबंधित मामले में कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। योजनाओं और भवनों का चयन जनहित को ध्यान में रखकर हो बैठक में उपायुक्त ने योजनाओं और सरकारी भवनों के निर्माण को लेकर भी अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना, भवन या सेवा केंद्र के लिए स्थान का चयन करते समय जनहित, उपयोगिता और लाभुकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी भवन या योजना का निर्माण केवल निर्माण पूरा करने के उद्देश्य से नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक उपयोग और आम लोगों को मिलने वाला लाभ भी सुनिश्चित होना चाहिए। उपायुक्त ने चेतावनी दी कि यदि उनके कार्यकाल में यह सामने आता है कि किसी विभाग ने सेवा देने के लिए ऐसी जगह का चयन किया है, जो बाद में अनुपयोगी साबित होती है, तो संबंधित विभाग की जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में अपर समाहर्ता के अलावा विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, नीलाम पत्र पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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