Jharkhand (Hazaribagh): रामनवमी के पहले मंगला जुलूस के दौरान कुसुंभा गांव में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए क्रूर बलात्कार और हत्या के विरोध में हजारीबाग के लोगों और भाजपा समर्थकों द्वारा जिलाव्यापी बंद का पालन करने के कारण सोमवार को हजारीबाग में व्यापक जन आक्रोश फैल गया. इस बंद से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ, बाजार बंद रहे और प्रदर्शनकारी तत्काल न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए. हजारीबाग के अलावा चतरा, जमशेदपुर आदि कई जिलों में भी लोगों में आक्रोश है. वहीं जोरदार प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं.
बंद का व्यापक असर
प्रदर्शनकारियों ने हजारीबाग शहर और विष्णुगढ़ ब्लॉक मुख्यालय में मार्च किया, जिससे दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हो गए. हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल, बरही विधायक मनोज कुमार यादव और भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह सहित सैकड़ों प्रतिभागियों ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया.
राजनीतिक और कानूनी दबाव
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अपराध के छह दिन बाद भी मुख्य दोषियों को गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया और इस देरी को "बिगड़ती कानून-व्यवस्था" का सबूत बताया. सांसद मनीष जायसवाल ने राज्य सरकार की "हैरान कर देने वाली चुप्पी" की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों ने पीड़ित परिवार के प्रति बुनियादी सहानुभूति तक नहीं दिखाई.
यह विरोध प्रदर्शन झारखंड उच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण कदम के बाद हुआ है, जिसने आज सुबह मामले का स्वतः संज्ञान लिया. न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर गिरफ्तारी न होने को "गंभीर चिंता का विषय" बताया.
जांच की स्थिति
पीड़िता पिछले मंगलवार शाम शोभायात्रा देखते समय लापता हो गई थी; खोजकर्ताओं ने अगली सुबह पास की झाड़ियों में उसका क्षत-विक्षत शव बरामद किया. डीजीपी तदाशा मिश्रा ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, लेकिन पुलिस ने अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है.
हजारीबाग एसपी ने वर्चुअल कार्यवाही के दौरान उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि एसआईटी जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लेगी. इस बीच, प्रशासन ने जिले भर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है.
सुनसान खेत में पाया गया नाबालिग का शव
शव को स्कूल के पीछे फेंक दिया गया, चश्मदीदों के मुताबिक बच्ची आखरी बार रात 8 बजे मंगला जुलूस में नृत्य करती देखी गई थी. इसके बाद उसका कोई पता नहीं चला था वो लापता हो गई थी. रात भर परिजन उसे ढूंढते रहे. सुबह 8:30 बजे उसका शव मध्य विद्यालय कुसुंभा के पीछे एक बांस के पेड़ के नीचे में पड़ा मिला था.
ग्राम प्रधान के अनुसार, लड़की अपने परिवार के साथ जुलूस में शामिल होने गई थी. जिसकी उम्र 12 वर्ष बताई जा रही है. उन्होंने कहा, “जुलूस पास में ही हो रहा था और टोला के अधिकांश परिवार वहां मौजूद थे. वह अपने परिवार के साथ थी.”
उन्होंने बताया कि जब वह रात 8-9 बजे तक घर नहीं लौटीं, तो परिवार ने सोचा कि शायद वह दोस्तों के साथ होंगी या खाना खाने गई होंगी. उन्होंने कहा, "कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी जब उनका कोई पता नहीं चला, तो उनके परिवार और ग्रामीणों ने देर रात तक, लगभग 1 या 2 बजे तक उनकी तलाश की."
अगले दिन, सुबह करीब 8 बजे, परिवार ने उन्हें बताया कि लड़की लापता है. उन्होंने कहा, "हमने उनसे एक तस्वीर साझा करने और पुलिस से संपर्क करने के लिए कहा." कुछ ही समय बाद, उन्हें सूचना मिली कि लड़की मृत पाई गई है.
उसने शव देखने का दावा किया. उसने कहा, "पत्थर से उसका चेहरा इस कदर कुचल दिया गया था, कि चेहरा पहचानना भी मुश्किल था.
पुलिस को संदेह है कि लड़की के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के बाद, आरोपी ने पत्थर से उसका चेहरा कुचलकर उसकी पहचान छिपाने की कोशिश की. अधिकारियों ने बताया कि इन पहलुओं की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इसकी पुष्टि हो जाएगी.









