पृथ्वी राजमार्ग पर मंडरा रहा खतरा, नेपाल में बाढ़ के बाद कई हिस्सों में सड़क नदी में समाई
नेपाल में बाढ़ के बाद त्रिशूली नदी के कटान और भूस्खलन से पृथ्वी राजमार्ग के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं। काठमांडू और पश्चिमी नेपाल के बीच यातायात प्रभावित है, कई जगह एकतरफा आवाजाही चल रही है।

Nepal: सुवा में आई बाढ़ के बाद त्रिशूली नदी का कटान अब पृथ्वी राजमार्ग के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। नदी के तेज बहाव ने राजमार्ग के कई हिस्सों को काट दिया है, जबकि कुछ जगह भूस्खलन के बाद सड़क धंस गई। इससे काठमांडू और पश्चिमी नेपाल के बीच आने-जाने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
कृष्णभीर में 120 मीटर सड़क को नुकसान
नागढुंगा–मुग्लिन सड़क परियोजना के पूर्वी खंड के इंजीनियर राजीव मानन्धर के मुताबिक, मलेखु से पहले कृष्णभीर इलाके में बाढ़ के बाद करीब 120 मीटर सड़क कट गई। इसके बाद वहां भूस्खलन हुआ और सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया।
मलेखु से काठमांडू की ओर करीब एक किलोमीटर दूर परेवाभीर में भी स्थिति खराब है। यहां त्रिशूली नदी के कटान से करीब 100 मीटर सड़क प्रभावित हुई है।
कहीं एक लेन, कहीं पूरी तरह रुक सकता है ट्रैफिक
छहरे–चालिसे इलाके में करीब 40 मीटर सड़क कटने के बाद फिलहाल एकतरफा यातायात चलाया जा रहा है। वहीं, नागढुंगा चेकपोस्ट से करीब 500 मीटर की दूरी पर लगभग 80 मीटर हिस्से में भूस्खलन हुआ है। इस वजह से यहां भी सिर्फ एक लेन से वाहनों को निकाला जा रहा है।
सड़क की मौजूदा हालत को देखते हुए विभाग ने यात्रियों के साथ मालवाहक वाहनों को भी सावधानी बरतने और जरूरत के मुताबिक वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
भारी वाहनों के लिए ये रास्ते विकल्प
सड़क विभाग के अनुसार, बड़े मालवाहक वाहन बीपी राजमार्ग, कान्ति लोकपथ और त्रिभुवन राजपथ का इस्तेमाल कर सकते हैं। हेटौँडा–फर्पिङ होते हुए काठमांडू जाने वाले छोटे वाहनों के लिए भी वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराए गए हैं।
फिस्लिङ में फंसे यात्रियों के लिए भी वैकल्पिक रास्ता
फिस्लिङ इलाके में अगर यात्री रास्ते में रुकते हैं, तो ज्यामिरेघाट पुल से गोरखा के सिउरेनीटार–घ्याल्चोक होते हुए बेनीघाट पुल तक जाने वाला वैकल्पिक मार्ग इस्तेमाल किया जा सकता है।
उधर, परेवाटार में सड़क की मरम्मत का काम पूरा होने के बाद 12 चक्के तक के मालवाहक वाहनों को भी इस रास्ते से चलाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, राजमार्ग के कई हिस्सों की हालत अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
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