'छात्रों पर नहीं दर्ज होंगे नए केस', NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, पुराने अपराधियों पर जारी रहेगी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़ी देशभर की FIR रद्द करने का आदेश दिया। छात्रों को राहत मिली, जबकि गंभीर आपराधिक इतिहास वाले 2,873 लोगों पर कार्रवाई जारी रहेगी।

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों और आंदोलनकारियों को बड़ी राहत दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने प्रदर्शन के दौरान पांच राज्यों में दर्ज मुकदमों समेत देशभर में दर्ज सभी FIR को निरस्त (रद्द) करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आगे भी किसी नई FIR को दर्ज करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
पांच राज्यों की मांग पर पूरे देश के छात्रों को राहत
अदालत ने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम में दर्ज मुकदमों को खारिज करने का निर्देश दिया। हालांकि इन पांचों राज्यों ने ही अपने यहां दर्ज मामले रद्द करने की अर्जी लगाई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने दायरा बढ़ाते हुए देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े सभी मामलों को खत्म करने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि दिल्ली पुलिस उन 2,873 लोगों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रखेगी, जिनका पहले से गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है।
सरकार और पार्टी में बनी सहमति, 5 सितंबर का आंदोलन वापस
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि 25 जुलाई को सरकार और काकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में बनी सहमति के तहत केंद्र सरकार ने ये मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है। सरकार के इस कदम के बाद पार्टी प्रवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वे 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना अगला विरोध प्रदर्शन वापस ले रहे हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि दोनों पक्षों में आपसी सहमति बन जाए, तो कुछ भी असंभव नहीं है।
संसद मार्च और लाठीचार्ज के बाद गरमाया था मुद्दा
NEET Paper Leak का मामला सामने आने के बाद जून महीने में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था, जिसे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन ने और हवा दी। इसके बाद 20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग की घटनाएं सामने आई थीं। बाद में तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और सरकार के साथ वार्ताओं के बाद आंदोलन को विराम दिया गया था, जिसके तहत अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी मुकदमों को निरस्त करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दी है।
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