क्या आपकी प्लेट में तो नहीं पहुंच रही प्रतिबंधित थाई मांगुर?, ऐसे रहें सतर्क
बाजार में मछली खरीदते समय अक्सर लोग स्वाद, ताजगी और कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि आप कौन सी मछली खरीद रहे हैं।


Fish Health News: क्या आप भी मछली खाने के शौकीन हैं? बाजार में मछली खरीदते समय अक्सर लोग स्वाद, ताजगी और कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि आप कौन सी मछली खरीद रहे हैं।
इन दिनों थाई मांगुर यानी अफ्रीकी कैटफिश (African Catfish) को लेकर फिर चर्चा तेज है। यह एक विदेशी प्रजाति है, जिसकी खेती और बिक्री को लेकर भारत में लंबे समय से प्रतिबंध और कार्रवाई की बातें सामने आती रही हैं। हाल ही में नागपुर में प्रतिबंधित कैटफिश पालन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में मछलियां जब्त कर नष्ट किए जाने की खबर भी सामने आई।
आखिर थाई मांगुर पर रोक क्यों?
थाई मांगुर को आमतौर पर Clarias gariepinus, यानी अफ्रीकी कैटफिश प्रजाति से जोड़ा जाता है। यह मछली तेजी से बढ़ती है और कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकती है। यही वजह है कि कुछ जगहों पर इसके अवैध पालन की शिकायतें सामने आती रही हैं।
लेकिन विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर है। यह एक आक्रामक विदेशी प्रजाति मानी जाती है और प्राकृतिक जलस्रोतों में पहुंचने पर स्थानीय जलीय प्रजातियों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
देसी मछलियों पर पड़ सकता है असर
अफ्रीकी कैटफिश बहुत आक्रामक शिकारी मछली मानी जाती है। अगर यह तालाबों, नदियों या दूसरे प्राकृतिक जलस्रोतों में फैल जाती है, तो स्थानीय मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसकी वजह से स्थानीय जैव विविधता प्रभावित होने की आशंका रहती है। यही कारण है कि ऐसी विदेशी और आक्रामक प्रजातियों को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं।
क्या इसे खाना सीधे तौर पर खतरनाक है?
यहां एक बात समझना जरूरी है। किसी भी मछली को खाने से होने वाला स्वास्थ्य जोखिम उसके पालन के तरीके, पानी की गुणवत्ता, चारे और उसमें मौजूद प्रदूषकों पर निर्भर करता है।
अगर मछली प्रदूषित पानी में पाली गई हो या उसमें भारी धातु और अन्य हानिकारक तत्व मौजूद हों, तो ऐसे पदार्थ शरीर तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, हर थाई मांगुर में लेड, मर्करी या अन्य टॉक्सिन होने और उसे खाने से निश्चित रूप से कैंसर जैसी बीमारी होने का दावा बिना ठोस परीक्षण के नहीं किया जाना चाहिए।
इसलिए खबर में स्वास्थ्य संबंधी दावों को संभावित जोखिम के रूप में पेश करना ज्यादा सटीक होगा।
पकाने से हर खतरा खत्म नहीं होता
मछली को अच्छी तरह पकाने से कई प्रकार के जीवाणु और परजीवी खत्म हो सकते हैं, लेकिन यदि उसमें पहले से कुछ रासायनिक प्रदूषक या भारी धातुएं मौजूद हों, तो केवल पकाने से वे जरूरी नहीं कि खत्म हो जाएं।
इसलिए मछली खरीदते समय उसके स्रोत और गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
मछली खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान
1. विश्वसनीय दुकानदार या बाजार से ही मछली खरीदें।
2. किसी संदिग्ध या अनजान प्रजाति की मछली खरीदने से पहले उसकी जानकारी लें।
3. मछली के पालन और स्रोत के बारे में पूछें।
4. बहुत गंदे पानी या संदिग्ध परिस्थितियों में रखी मछली खरीदने से बचें।
5. यदि किसी इलाके में किसी प्रजाति पर प्रतिबंध है, तो उसकी खरीद-बिक्री से दूर रहें।
एक बात जरूर याद रखें
थाई मांगुर को लेकर सबसे बड़ी चिंता केवल खाने से जुड़ी नहीं है, बल्कि इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित असर और अवैध पालन को लेकर भी है। इसलिए उपभोक्ताओं को जागरूक रहना चाहिए और प्रशासन को भी प्रतिबंधित प्रजातियों की अवैध बिक्री पर नजर रखनी चाहिए।

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