'हमें खुद चलाने दो मेस!', CUJ में मेस फीस की मार पर भारी उबाल, मांग पर अड़े छात्र
CUJ रांची में मेस फीस बढ़ोतरी और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ छात्रों ने धरना शुरू किया है। छात्र खुद मेस चलाने का अधिकार, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक छात्र संघ चुनाव की मांग कर रहे हैं।

CUJ University Ranchi: केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ), रांची के कैंपस में छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। अपने बुनियादी अधिकारों, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छात्र खुले आसमान के नीचे जोरदार धरने पर बैठ गए हैं। रात के 9 बजे के बाद भी आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे और साफ कर दिया कि जब तक प्रशासन ठोस फैसला नहीं लेता, वे धरना स्थल से टस से मस नहीं होने वाले हैं।
मेस के बढ़े दामों ने बिगाड़ा छात्रों का बजट
छात्रों के इस तीखे आक्रोश की सबसे बड़ी वजह हॉस्टल की मेस फीस में लगातार की जा रही भारी बढ़ोतरी है। छात्रों का कहना है कि पहले जहां मेस का मासिक खर्च लगभग 2,621 रुपये हुआ करता था, उसे बाद में बढ़ाकर यूजी हॉस्टल के लिए 3,071 रुपये और पीजी व पीएचडी हॉस्टल के लिए करीब 3,377 रुपये कर दिया गया। अब प्रशासन की ओर से मेस फीस को बढ़ाकर 3,800 रुपये से अधिक के साथ जीएसटी लगाने की तैयारी चल रही है। छात्रों का दर्द यह है कि जेब पर इतना बड़ा बोझ डालने के बाद भी उन्हें शाम का नाश्ता तक नहीं दिया जा रहा है।
'हमें खुद मेस चलाने का मिले अधिकार, तभी आएगी पारदर्शिता'
हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की दो टूक मांग है कि मेस संचालन की पूरी जिम्मेदारी और विकल्प खुद छात्रों को दिया जाए। छात्रों का तर्क है कि जब छात्र खुद मेस की कमान संभालेंगे, तभी खाने की क्वालिटी बेहतर हो सकेगी, लागत में कमी आएगी और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता तय हो पाएगी। वर्तमान व्यवस्था में मनमाना बिल वसूला जा रहा है और खाने की गुणवत्ता पर किसी की जवाबदेही नहीं दिख रही है।
लोकतांत्रिक छात्र संघ चुनाव और बातचीत से हल निकालने की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि वे किसी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे अपने जायज लोकतांत्रिक हक के लिए आवाज उठा रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांग है कि यूनिवर्सिटी में जल्द से जल्द लोकतांत्रिक तरीके से छात्र संघ चुनाव कराए जाएं, ताकि छात्रों के चुने हुए प्रतिनिधि उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को प्रशासन और विभिन्न कमेटियों के सामने मजबूती से रख सकें। छात्रों ने प्रशासन से अपील की है कि वह हठधर्मिता छोड़कर प्रतिनिधिमंडल से सीधी बातचीत करे, क्योंकि यह विश्वविद्यालय छात्रों के दम पर ही चलता है और इससे जुड़े हर बड़े फैसले में छात्रों की भागीदारी होना बेहद जरूरी है।
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