बिना प्रोटोकॉल प्रोजेक्ट भवन पहुंचे CM हेमंत सोरेन, शहीद परिवारों के बच्चों हेतु विशेष स्कूल का ऐलान
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को सुरक्षा प्रोटोकॉल छोड़कर एक आम नागरिक की तरह प्रोजेक्ट भवन पहुंचे। उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों और सैन्य बलों के बच्चों के लिए ‘दिशोम गुरु आवासीय विद्यालय' के निर्माण की समीक्षा की।

Ranchi, Jharkhand: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आज एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. मुख्यमंत्री सुरक्षा और प्रोटोकॉल के तामझाम को दरकिनार कर एक आम आदमी की तरह सीधे प्रोजेक्ट भवन पहुंचे. मुख्यमंत्री के इस सादगी भरे कदम से सचिवालय कर्मियों और आम लोगों में काफी उत्साह देखा गया. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि वे स्वयं को एक सामान्य नागरिक मानते हैं और उनकी प्राथमिकता राज्य की स्थिति को आम आदमी की नजर से देखने की है.
शहीद परिवारों के लिए 'दिशोम गुरु आवासीय विद्यालय'
प्रोजेक्ट भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि रांची के रिंग रोड स्थित जैगुआर कैंपस में 'दिशोम गुरु आवासीय विद्यालय' प्रस्तावित है. यह विद्यालय विशेष रूप से शहीद पुलिसकर्मियों, सेना के जवानों और सुरक्षा बलों के बच्चों को समर्पित होगा. मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस विद्यालय के निर्माण से आम जनता के बच्चों को भी आधुनिक और उच्च स्तरीय शिक्षा मिल सकेगी.
बंगाल चुनाव पर प्रतिक्रिया
मीडिया से बातचीत के दौरान जब मुख्यमंत्री से बंगाल चुनाव के संदर्भ में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही संयमित उत्तर दिया. उन्होंने कहा कि अभी चुनाव के नतीजों पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी. बंगाल की जनता को कल अपने मताधिकार का प्रयोग करना है, इसलिए जनता को ही अपना फैसला करने देना चाहिए. उन्होंने विश्वास जताया कि चुनाव संपन्न होने के बाद स्थितियां खुद-ब-खुद स्पष्ट हो जाएंगी.
शिक्षा को लेकर दूरगामी विजन
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवासीय विद्यालय के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए. सरकार का लक्ष्य एक ऐसा शैक्षिक ढांचा तैयार करना है जो न केवल राज्य बल्कि देश के लिए एक मॉडल साबित हो. शहीद परिवारों के बच्चों के भविष्य को संवारना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है.
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