Chandra Grahan 2026: साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण कई घंटों तक चलेगा और सुबह जल्दी या आधी रात को जागने वाले लोगों को इसका शानदार नजारा देखने का सौभाग्य मिलेगा. सूर्य ग्रहण के विपरीत, जिसमें आंखों की सुरक्षा और सटीक समय की आवश्यकता होती है, चंद्र ग्रहण धीरे-धीरे होता है और चांद के स्पष्ट दृश्य वाले किसी भी स्थान से इसे सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है.
भारत में मंगलवार, 3 मार्च, 2026 को पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा, जो खगोलीय घटनाओं में सबसे अद्भुत घटनाओं में से एक है. पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान, चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, जिससे वह गहरा दिखाई देता है. इसके विपरीत, आंशिक चंद्रग्रहण तब होता है जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, आगामी चंद्रग्रहण की तीव्रता 1.155 होगी, जो इसे एक गहन पूर्ण चंद्रग्रहण बनाती है. यह खगोलीय घटना भारत के साथ-साथ पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में भी दिखाई देगी.
भारत में दृश्यता की स्थिति
विभाग के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में लोग चंद्रोदय के समय ग्रहण के अंतिम चरण देख सकेंगे. हालांकि, पूर्वोत्तर भारत और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ क्षेत्रों में पूर्णग्रहण समाप्त होने से पहले ही उसका अंत देखा जा सकेगा.
सुबह सूतक से पहले निपटा लें ये 5 काम
चंद्र ग्रहण का सूतक काल कल सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो जाएगा. सूतक लगने से पहले खान-पान से जुड़े कार्य पूरे कर लें. इस अवधि में सब्जी काटने, छीलने या पकाने का काम न करें. घर में रखे पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते पहले ही डाल दें. ताकि ग्रहण का प्रभाव खाने की चीजों पर न पड़े. तुलसी के पत्ते भी सूतक लगने से पहले ही तोड़कर रख लें. पूजा-पाठ या घर के मंदिर की साफ-सफाई सुबह जल्दी उठकर कर लें. अपना कोई भी जरूरी या बड़ा काम सूतक लगने से पहले कर लें तो बेहतर होगा.
महत्वपूर्ण समय-सारणी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भारतीय मानक समय के अनुसार निम्नलिखित समय-सारणी प्रदान की है:
ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर 6:48 तक रहेगा. वहीं पूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 4:34 से 5 बजकर 33 मिनट तक देखा जा सकेगा.
विश्व स्तर पर पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, भारत के अधिकांश हिस्सों में सूर्यास्त के समय चंद्रमा के उदय के आसपास ग्रहण का अंतिम चरण ही दिखाई देगा. उदाहरण के लिए, नागपुर और चेन्नई जैसे शहरों में, दर्शक पूर्वी क्षितिज से ऊपर उठते समय चंद्रमा के एक हिस्से को पृथ्वी की छाया से आंशिक रूप से ढका हुआ देख सकेंगे.
होली पर कितना पड़ेगा ग्रहण का प्रभाव?
साल का ये पहला चंद्र ग्रहण होली के संयोग में ही पड़ रहा है. होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा पर किया जाता है. लेकिन चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि नहीं मिल रही है. इसलिए लोग असमंजस में हैं कि वो 2 मार्च को होलिका दहन करें या 3 मार्च को. ऐसे में ज्योतिषविदों का सुझाव है कि होलिका दहन 2 और 3 मार्च दोनों दिन किया जा सकता है. 2 मार्च की मध्य रात्रि को भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन कर सकते हैं. इस समय पूर्णिमा भी रहेगी. इसके अलावा, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद भी होलिका दहन कर सकते हैं, क्योंकि इस दिन भद्रा नहीं है. लेकिन प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा नहीं मिल रही है.








