निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, कोर्ट ने सशर्त दी जमानत
सुप्रीम कोर्ट निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को सशर्त जमानत देते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वे जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे और गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे.

Ranchi News: निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वे जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे और गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे. आज, सोमवार (13 अप्रैल 2026) को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरथना और उज्ज्वल भुयान की पीठ में विनय चौबे की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई.
इस दौरान चौबे की ओर से यह दलील दी गई कि मामले में सुधीर कुमार सिंह और विजय प्रताप सिंह को जमानत दे दी गई है जो इस मामले में लाभार्थी थे. विनय चौबे की तरफ से दलील पेश करते हुए यह भी कहा गया कि यह पूरा प्रकरण वर्ष 2009-2010 का है और इस वक्त वे हजारीबाग जिला के उपायुक्त (DC) थे. जमीन से जुड़े इस पूरे मामले में वे पिछले 7 महीनों से जेल में सजा काट रहे हैं. झारखंड सरकार की तरफ से कहा गया है कि विनय चौबे चार और मामले में अभियुक्त हैं.
20 मई 2025 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने विनय चौबे को गिरफ्तार किया था जिसके बाद से वे जेल में बंध थे. उनपर आरोप था किउत्पाद नीति 2022 के तहत मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर उन्होंने जानबूझ कर काम करने दिया. जिससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ. बता दें, इससे पहले चौबे की जमानत याचिका को झारखंड हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया था हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने उन्हें जमानत को खारिज कर दी थी जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
शराब घोटाले में चौबे की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ चार प्राथमिकी दर्ज की गई. विनय चौबे के खिलाफ हजारीबाग में जमीन के दो मामलों में केस दर्ज की गई थी जिसमें एक मामला खास महल जमीन और जबकि दूसरा मामला वनभूमि में गड़बड़ी से संबंधित है. दोनों ही मामलों में चौबे पर आरोप है कि हजारीबाग उपायुक्त रहते हुए उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने करीबियों के हवाले जमीन कर दी. जिसके बाद ACB रांची में शराब घोटाले से संबंधित गड़बड़ी को आधार बनाकर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में विनय चौबे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. बता दें, चौबे के खिलाफ पांचवी प्राथमिकी जगन्नाथपुर थाने में ठगी के आरोप में दर्ज की गयी. फिलहाल इन सभी मामलों में अभी भी जांच जारी है.
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