झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला!, अवैध बुलडोजर कार्रवाई पर सरकार की अपील खारिज, यहां DC को एक हफ्ते में देना होगा 5.25 लाख का मुआवजा
कोर्ट ने चतरा डीसी को एक सप्ताह में 5.25 लाख रुपये मुआवजा जमा करने का निर्देश दिया और कार्रवाई को सरकारी शक्ति का दुरुपयोग बताया।

Jharkhand High Court : झारखंड उच्च न्यायालय ने सरकारी मशीनरी और शक्ति के दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार को तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने बिना किसी कानूनी अधिकार के एक नागरिक की दुकान बुलडोजर से गिराए जाने के मामले में सरकार की लेटर्स पेटेंट अपील यानी एलपीए को पूरी तरह खारिज कर दिया है और सिंगल बेंच के पुराने आदेश को बिल्कुल बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस पूरी कार्रवाई को सरासर मनमानी और सरकारी ताकत का गलत इस्तेमाल करार दिया है।
चतरा DC को एक हफ्ते के भीतर जमा करने होंगे 5.25 लाख रुपये
खंडपीठ ने बहुत कड़ा रुख अपनाते हुए चतरा के उपायुक्त को यह सख्त निर्देश दिया है कि वे महज एक हफ्ते के भीतर 5.25 लाख रुपये की मुआवजा राशि सीधे झारखंड उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा कराएं। अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि तय समय सीमा के अंदर यह पैसा जमा करने की पूरी व्यक्तिगत जिम्मेदारी खुद उपायुक्त की होगी। जैसे ही यह राशि कोर्ट में जमा हो जाएगी, पीड़ित व्यक्ति अपनी सही पहचान और बैंक डिटेल्स देकर आसानी से अपना मुआवजा प्राप्त कर सकेगा।
न्यायिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल है सरकार की यह अपील
अदालत ने अपनी तीखी टिप्पणी में कहा कि राज्य सरकार की तरफ से लाई गई यह अपील साफ तौर पर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग लगती है। खंडपीठ ने तो यहाँ तक कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह अपील उन चुनिंदा अधिकारियों के बचाव के लिए दाखिल की गई है, जिन्हें यह डर सता रहा है कि आने वाले समय में मुआवजे की भरपाई उन्हें अपने स्तर से करनी पड़ सकती है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर इस मामले में किसी तरह का बदलाव किया जाता, तो वह मुआवजे की रकम को बढ़ाने के लिए होता, क्योंकि सिंगल बेंच द्वारा तय की गई निर्माण लागत और मानसिक क्षतिपूर्ति की राशि वैसे ही काफी कम है। इसके बावजूद कोर्ट ने सरकार की अपील में कोई भी दम न पाते हुए उसे खारिज करना ही उचित समझा।
साल 2011 से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा विवाद चतरा के रहने वाले राजेंद्र प्रसाद साहू उर्फ राजेंद्र प्रसाद शौंडिक की दुकान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने साल 2011 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और यह आरोप लगाया था कि जिला प्रशासन ने प्लॉट संख्या-296 और खाता संख्या-36 पर बनी उनकी दुकान को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए अचानक बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया था।
सिंगल बेंच के फैसले पर लगी मुहर, अवमानना याचिका पर भी चल रही सुनवाई
इस पुराने मामले में सुनवाई करते हुए High Court की सिंगल बेंच ने बीते 27 जून 2024 को राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह दुकान के निर्माण में लगे खर्च के रूप में पांच लाख रुपये और मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये यानी कुल 5.25 लाख रुपये का मुआवजा छह हफ्ते के भीतर दे। लेकिन सरकार की ओर से आदेश का समय पर पालन नहीं किए जाने के बाद पीड़ित ने अदालत में अवमानना याचिका भी दायर कर रखी है। अब खंडपीठ ने सरकार की अपील को सिरे से खारिज करते हुए सिंगल बेंच के उस फैसले पर अपनी पक्की मुहर लगा दी है।
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