सदर अस्पताल पर बड़ा आरोप! जुड़वां बच्चों में एक को मृत बताकर बदलने का दावा, परिवार का हंगामा
बेगूसराय सदर अस्पताल में जुड़वां नवजातों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने जिंदा बच्चे को बदलकर मृत नवजात सौंपने का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि एक बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी और दूसरा अभी भी इलाजरत है।


बेगूसराय: बेगूसराय का सदर अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला जुड़वां नवजात बच्चों से जुड़ा है। एक परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने जिंदा बच्चे को बदलकर मृत नवजात सौंप दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में कई घंटों तक हंगामा मचा रहा, जिसके चलते स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा है कि चिकित्सा रिकॉर्ड के अनुसार एक नवजात की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि दूसरा बच्चा अभी भी गंभीर हालत में इलाज करवा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, लोहियानगर थाना क्षेत्र के आनंदपुर मोहल्ला निवासी आनंद कुमार की पत्नी सुनीता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार को बेगूसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक महिला ने जुड़वां बच्चों, एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया। परिवार का आरोप है कि दोनों बच्चे जन्म के समय जीवित थे और मां ने दोनों को दूध भी पिलाया था। बाद में दोनों नवजातों को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि कुछ समय बाद अस्पताल की ओर से उन्हें एक मृत नवजात सौंप दिया गया और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए। इसके बाद उन्हें संदेह हुआ कि उनके जीवित बच्चे को बदल दिया गया है। आरोपों के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा मचाया। जैसे ही मामला बढ़ा, पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाल लिया। इस घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और परिजनों को समय पर सूचना देने के मुद्दे पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सिविल सर्जन ने क्या कहा?
बेगूसराय के सिविल सर्जन, डॉ. अशोक कुमार ने इन आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया। उन्होंने बताया कि जुड़वां बच्चों में से एक की स्थिति जन्म के बाद काफी गंभीर हो गई थी और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनके अनुसार, उस नवजात की दो दिन पहले ही मौत हो गई थी, जबकि दूसरा बच्चा अभी भी गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर इलाज करवा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मां शायद यह नहीं समझ पाईं कि कौन सा बच्चा जीवित है और कौन सा नहीं। हालांकि, इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर अस्पताल के मुताबिक नवजात की मौत दो दिन पहले हो गई थी, तो परिजनों को इसकी जानकारी तुरंत क्यों नहीं दी गई?
इस समय दोनों पक्षों के दावे एकदम अलग हैं। परिजन जिंदा बच्चे के बदलने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। अब इस पूरे मामले की सच्चाई प्रशासनिक जांच और उपलब्ध चिकित्सा रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आएगी।
(बेगूसराय से बबलू की रिपोर्ट)

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