Bengal Election Result: जनता पर इस बार नहीं चला ममता का जादू, आजादी के बाद पहली बार सत्ता में आई Right Wing पार्टी
ममता बनर्जी 2011 से बंगाल की सीएम के तौर पर विराजमान थी. जिसे बीजेपी ने अब 15 साल बाद टेकओवर कर लिया है. आजादी के बाद से ही बंगाल की जनता ने वामपंथी पार्टियों पर सत्ता को लेकर भरोसा जताया था, अब देखना होगा बीजेपी बंगाल की राजनीति किस दिशा में ले जाती है!

Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के परिणाम ने कमल का फूल खिला दिया है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ का निर्माण 1951 में किया था, जो आगे चलकर 1980 में भाजपा के निर्माण का आधार बनी. इतने लंबे समयकाल में बंगाल में कितनी ही सरकारें आई लेकिन भाजपा का शासन कभी न आ सका. इस बार भाजपा का पूर्ण बहुमत से सत्ता में आना सिर्फ भाजपा नेताओं की मेहनत के बलबूते संभव नहीं हुआ है, बल्कि बंगाल की जनता भी बदलाव चाहने लगी थी.
पिछले कई वर्षों से महिला सुरक्षा और राज्य की आर्थिक स्थिति की गिरती परिस्थितियों ने जनता को सत्ता में परिवर्तन लाने की चाह को हवा देने का काम किया. इस प्रकार ममता के 15 वर्षीय शासनकाल की समाप्ति होती है.
'झालमुड़ी' से पैदा हुई राजनीतिक लहर
चुनावी सभाओं के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं का विश्वास जीत को लेकर भर-भरकर देखने को मिल रहा था. वहीं भाजपा के उम्मीदवार और स्टार प्रचारकों को भी जीतने को लेकर पूर्ण विश्वास था. जिसका परिणाम 4 मई को देखने को मिल गया. देश में सभी भाजपा कार्यालयों में जीत की लहर दौड़ पड़ी है. सभी एक-दूसरे को मिठाइयां तो खिला ही रहे हैं. साथ ही पीएम मोदी के झालमुड़ी खाने वाली वीडियो वायरल होने के बाद जीत का जश्न मनाने के लिए अब इसका भी प्रयोग किया जाने लगा है.
अब तक कब-कब किस सरकार की रही सत्ता
आजादी के बाद बंगाल में पहली बार कांग्रेस ने सत्ता संभाली. कांग्रेस के प्रफुल्ल चंद्र घोष ने बंगाल के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर पदभार संभाला. कांग्रेस का शासनकाल 1947 से 1977 तक चला. इस दौरान अस्थिरता के कारण कुछ बार राष्ट्रपति शासन भी लगा.
इसके बाद एक दौर आया जब बंगाल की सत्ता वामपंथी पार्टी वाम मोर्चा के हाथों में चली गई. जिन्होंने एक वृहद शासनकाल का लुत्फ उठाया. 1977 में सत्ता पर आने के बाद अलग-अलग मुख्यमंत्रियों ने 2011 तक सत्ता किसी और पार्टी के हाथ नहीं लगने दी.
15 साल बाद 'दीदी' का सूर्य अस्त
2011 में आखिरकार ममता दीदी का सूर्य उदय होता है. ममता ने 34 साल लंबे कंम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को पटखनी दी और बंगाल की जनता का विश्वास अगले दो चुनावों में भी जीता. ममता का तिलिस्म 15 साल बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में टूटा और दक्षिण पंथी विचारधारा वाली बीजेपी ने अपना झंडा गाड़ दिया. परिवर्तन की ओर इशारा तो बीजेपी के जीतने से ही हो चुका है. लेकिन देखना होगा कि यह परिवर्तन बंगाल की जनता के पाले में जाता है या बीजेपी नेताओं के.
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