उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी से सहायक जेलर फिरोजा खातून को हुआ प्यार, घरवालों के विरोध के बीच कर ली शादी
एमपी के सतना जिले स्थित सेंट्रल जेल की महिला अफसर फिरोजा खातून और उम्रकैद की सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह की अनोखी प्रेम कहानी इन दिनों काफी चर्चों में हैं जेल में मुलाकात के दौरान करीब आए और कैदी धर्मेंद्र की रिहाई के बाद दोनों ने 4 वर्षों बाद शादी कर ली है.

Satna / Madhya Pradesh (Report By- Ashok Soni): मध्य प्रदेश के सतना जिला स्थित सेंट्रल जेल से एक ऐसी दिलचस्प खबर सामने आई है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे. यह खबर किसी फिल्मी स्क्रीप्ट से कम नहीं लगती. क्योंकि यहां सतना के सेंट्रल जेल की महिला अफसर (सहायक जेल अधीक्षिका) फिरोजा खातून ने समाज और मजहब की दीवारों को पीछे छोड़... हत्या के मामले में सजा काट चुके कैदी धर्मेंद्र सिंह से शादी कर ली है. ये अनोखी शादी अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है.
बताया जा रहा है कि फिरोजा खातून और धमेंद्र सिंह के बीच प्यार इतना गहरा था कि उसने अपने कैदी प्रेमी को पाने के लिए मजहब की सारी दीवारें तोड़ दी इतना ही नहीं परिवार वालों के विरोध के बावजूद उसने अपने प्रेमी और पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह से हिंदू रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शादी रचा ली. शादी के दौरान बजरंग दल के लोगों ने फिरोजा का कन्यादान किया.

पार्षद की हत्या मामले में कोर्ट ने सुनाई थी उम्र कैद की सजा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मेंद्र मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित चंदला इलाके का रहने वाला है जिसे एक पार्षद की हत्या और शव दफनाने के मामले में साल 2007 में गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में कोर्ट ने धर्मेंद्र सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई जिसके बाद उसकी जिंदगी जेल की चारदीवारी में हमेशा के लिए कैद होकर रह गई. इस दौरान उसके शुरुआती साल मुश्किलों में गुजरे. लेकिन धीरे-धीरे उसके व्यवहार और में बदलाव होने लगा. जेल प्रशासन के अनुसार, धर्मेंद्र अनुशासित रहने लगा था. जिसके बाद कारण उसे जेल के भीतर कुछ जिम्मेदारियां सौंपी गई. बताया जाता है कि वह वारंट से संबंधित कार्यों को करने में अधिकारियों की मदद करता था. और यहीं से उसकी जिंदगी ने एक नई मोड़ ली.

दूसरी तरफ फिरोजा खातून सतना सेंट्रल जेल में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट के तौर पर तैनात थीं. उन्हें सख्त अनुशासन और जिम्मेदार कार्यशैली के लिए जाना जाता था. वारंट से संबंधित कार्यों के दौरान फिरोजा और धर्मेंद्र की मुलाकातें बढ़ने लगीं. प्रारंभिक दौर में दोनों के बीच रिश्ता सिर्फ एक अधिकारी और कैदी तक ही सीमित था लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ती गई और दौरान फिरोजा ने धर्मेंद्र के अंदर उस इंसान को झांककर देखा जो अपने पुराने अतीत से निकलकर नई जिंदगी की शुरूआत करने की इच्छा रखता था. इस बीच धर्मेंद्र को पहली बार यह एहसास हुआ कि कोई है जो उसे अपराधी नहीं, बल्कि इंसान की तरह समझ रहा है.

14 वर्षों बाद जेल से रिहा हुए थे धर्मेंद्र
14 साल जेल में बिताने के बाद धर्मेंद्र को अच्छे आचरण के आधार पर रिहा कर दिया गया. वहीं, जेल से होने के बाद भी दोनों लगातार संपर्क में रहे. करीब चार साल बीत गया जिसके बाद दोनों ने समाज और परिवार की नाराजगी की परवाह किए बिना विवाह करने का निर्णय लिया. और इस रिश्ते को अब एक नाम दिया जाए. बताया जाता है कि फिरोजा के परिजन इस शादी के लिए सहमत नहीं थे और उन्होंने उनकी शादी समारोह में भी हिस्सा नहीं लिया. ऐसे में बजरंग दल क कार्यकर्ताओं ने आगे आकर फिरोजा के कन्यादान की जिम्मेदारी निभाई और विवाह संपन्न कराया.
बता दें, जेल की चारदीवारी के भीतर कानून और अनुशासन संभालने वाली महिला अधिकारी ने अपने निजी जीवन में ऐसा फैसला लेकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि मोहब्बत किसी जाति, धर्म या पहचान की मोहताज नहीं होती. अब इस शादी की खबर सामने आते ही केंद्रीय जेल सतना में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया. जेल कर्मचारियों से लेकर कैदियों तक के बीच इस अनोखी प्रेम कहानी की चर्चा हो रही है. कई लोगों ने इसे प्रेम, विश्वास और इंसानियत की मिसाल बताया.
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