देश भर में आयुष्मान भारत योजना से इलाज करने वाला सर्वश्रेष्ठ अस्पताल रांची का सदर अस्पताल बना था । इसके बाद से लगातार अस्पताल अत्याधुनिक सुविधा भी शुरू कर रहा है। लेकिन इन सब के बीच एक नया मामला सामने आया है । सदर अस्पताल में पिछले साल CT SCAN और MRI की सुविधा शुरू कर दी गई थी लेकिन अब KRISHNA डायग्नोस्टिक्स का 32 लाख रूपये बकाया सदर अस्पताल नहीं दे पा रहा है । इस सुविधा से शुरुआत में गरीबों को बड़ी राहत मिली क्योंकि बीपीएल, आयुष्मान कार्डधारी और अन्य योजनाओं से लोगों का मुफ्त में जांच होता था । लेकिन यह सुविधा अचानक से दिसंबर महीने से बंद हो गई है । बीपीएल मरीजों का सीटी स्कैन और MRI जांच अब सदर अस्पताल में नहीं हो रहा है । मरीजों को भी इसके कारण खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दरअसल कृष्णा डायग्नोस्टिक्स ने अगस्त 2025 से लेकर जनवरी 26 तक सैकड़ों बीपीएल मरीजों का जांच कराया । जिसका भुक्तान सदर अस्पताल को करना था क्योंकि MOU अस्पताल के साथ हुआ था । करीब 30 लाख रूपये का भुक्तान सदर अस्पताल ने अब तक कंपनी को नहीं किया है । यह 30 लाख रुपए कई योजनाओं को लेकर होते है । इसके साथ ही गंभीर बीमारी योजना का पैसा भी कंपनी को नहीं मिला है । इस पूरे मामले को लेकर रांची सिविल सर्जन ने बताया कि परेशानी जांच में हो रही है और कंपनी को भुक्तान भी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह "पैसा स्वास्थ विभाग को देना था लेकिन विभाग का मानना है कि कृष्णा फाउंडेशन के साथ विभाग ने कोई MOU नहीं किया है जिसके कारण भुक्तान में देरी हो रही है । पहले विभाग MOU करेगा फिर कंपनी को भुक्तान करेगा ।" फिलहाल रांची सदर अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रिम्स में चल रहे मणिपाल हेल्थ मैप का सहारा लिया है और जो भी मरीज होते हैं उन्हें एंबुलेंस के जरिए रिम्स जांच के लिए भेजा जाता है । इससे एजेंसी का तो लोड बढ़ ही रहा है लेकिन मरीजों को परेशानी अलग से हो रही है। अब यह पूरा मामला कहीं ना कहीं विभाग और सदर अस्पताल के फैसले के बीच सवाल खड़े करता है। रांची सदर अस्पताल में फाउंडेशन के साथ एम ओ यू किया था तब स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई थी । या फिर अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग रांची सदर अस्पताल में दूसरे एजेंसी को लाने की तैयारी में लगा है? हालांकि रिम्स में चल रहे मनिपाल हेल्थ मैप के साथ भी पूर्व में ऐसी घटना हो चुकी है जब रिम्स ने उन्हें लंबे समय तक भुगतान नहीं किया था और एजेंसी ने जांच बंद कर दी थी। स्वास्थ्य मंत्री को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था और आदेश दिया था की जांच वापस शुरू की जाए।









