"मंजिल मिलने तक नहीं मानेंगे हार...", झारखंड में 21 दिनों से डटे हैं छात्र, बारिश और वीकनेस भी नहीं डिगा पाई हौसला
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा सुधार की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन 21वें दिन भी जारी है। छात्र 15 अगस्त को रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से तिरंगा यात्रा निकालेंगे।

JPSC-JSSC Protest: झारखंड में अपने अधिकारों और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी रांची में चल रहा यह प्रदर्शन अब 21वें दिन में प्रवेश कर चुका है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर लगातार डटे हुए हैं। छात्रों ने अपने इस आंदोलन को और तेज करते हुए 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के मौके पर एक विशाल 'तिरंगा यात्रा' निकालने का ऐलान किया है, जिसमें पूरे राज्य के युवा शामिल होंगे।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकलेगी तिरंगा यात्रा
छात्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह तिरंगा यात्रा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होगी। इसके बाद यह यात्रा कचहरी, लालपुर और अल्बर्ट एक्का चौक से होते हुए वापस स्टेडियम पहुंचकर ही संपन्न होगी। इस शांतिपूर्ण यात्रा के जरिए छात्र सरकार और प्रशासन तक अपनी बुलंद आवाज पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
"यह सिर्फ नौकरी नहीं, भविष्य के सम्मान की लड़ाई है"
इस आंदोलन में शामिल बोकारो की छात्रा अनुपमा का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं की सामूहिक लड़ाई है, जो सालों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। शुरुआत में भले ही कम छात्र थे, लेकिन अब यह आंदोलन 21 दिन का लंबा सफर तय कर चुका है। वहीं, खरसावां की बेबी महतो ने कहा कि आज की यह लड़ाई सिर्फ एक नौकरी की नहीं, बल्कि छात्रों की मेहनत, पढ़ाई और भविष्य के सम्मान की लड़ाई है। सालों तक तैयारी करने के बाद भी जब परीक्षा और उसके परिणाम को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो युवाओं का भरोसा पूरी तरह टूट जाता है। छात्रों की बस एक ही मांग है कि झारखंड में ऐसी व्यवस्था बने, जहां उनकी मेहनत और योग्यता का पूरा सम्मान हो।
बारिश और शारीरिक कमजोरी के बावजूद नहीं टूट रहा हौसला
छात्रों के इस कड़े संघर्ष को समर्थन देने पहुंचीं अपूर्वा कहती हैं कि लगातार हो रही बारिश में भी छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनकी यह जिद्द और हार न मानने का जज्बा बहुत ही प्रेरणादायक है। जब तक उनकी बात नहीं मानी जाती, उन्हें हार नहीं माननी चाहिए और सरकार को जल्द से जल्द कोई रास्ता निकालना चाहिए।
वहीं, अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठी छात्रा सबिता ने अपनी हालत बयां करते हुए कहा, "अंदर से बहुत वीकनेस लग रही है और हाथ-पैर में काफी दर्द रहता है। दिन में दीदी लोग मालिश करके मुझे स्वस्थ रखने की कोशिश करती हैं ताकि आंदोलन को आगे जारी रखा जा सके। हमने इतने दिनों से पेपर लीक का भारी प्रेशर झेला है। कई परीक्षाएं दे चुकी हूं, पर अब तक रिजल्ट नहीं निकल सका है, यही दर्द और गुस्सा मुझे इस आंदोलन में डटे रहने की ताकत देता है।"
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