परिसीमन के नाम पर आदिवासियों का हक नहीं छिनने देंगे!, मोरहाबादी में बंधु तिर्की का शक्ति प्रदर्शन, CM की जगह पहुंचे विकास मुंडा
रांची के मोरहाबादी मैदान में बंधु तिर्की की अगुवाई में आदिवासी एकता महाजुटान हुआ। परिसीमन, CNT-SPT, MMDR बिल और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को लेकर आदिवासी नेताओं ने आवाज बुलंद की।

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को पूर्व मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता बंधु तिर्की की अगुवाई में 'आदिवासी एकता महाजुटान' का बड़ा आयोजन हुआ। इस रैली में राज्य के अलग-अलग जिलों से भारी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी न्योता भेजा गया था, लेकिन वे खुद नहीं पहुंच सके। सीएम की गैरमौजूदगी में उनकी तरफ से झामुमो (JMM) विधायक विकास कुमार मुंडा प्रतिनिधि बनकर मंच पर पहुंचे, जिसे सियासी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है।
परिसीमन से आदिवासी सीटों के घटने की चिंता, केंद्र सरकार पर साधा निशाना
महाजुटान में सबसे बड़ा मुद्दा नए परिसीमन (Delimitation) का रहा। मंच से आदिवासी नेताओं ने डर जताया कि अगर आने वाले दिनों में सिर्फ आबादी के आधार पर परिसीमन हुआ, तो झारखंड में आदिवासियों की राजनीतिक हिस्सेदारी और सीटों पर बड़ा असर पड़ेगा। बंधु तिर्की और दूसरे नेताओं ने साफ कहा कि परिसीमन में केवल जनसंख्या को पैमाना न बनाया जाए, बल्कि राज्य की खास परिस्थितियों, ऐतिहासिक विस्थापन और संविधान से मिले अधिकारों को भी ध्यान में रखा जाए। नेताओं ने केंद्र सरकार पर आदिवासी हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
जल-जंगल-जमीन, CNT-SPT और MMDR बिल पर आर-पार के मूड में समाज
इस महाजुटान में सिर्फ परिसीमन ही नहीं, बल्कि CNT-SPT एक्ट, एमएमडीआर (MMDR) संशोधन बिल, पांचवीं अनुसूची और जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दों पर भी जोरदार आवाज उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासियों के संवैधानिक और कानूनी हकों को बचाने के लिए पूरे समाज को एकजुट होकर लंबी लड़ाई लड़नी होगी। नेताओं ने केंद्र की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।
भीड़ ने दिया बड़ा राजनीतिक संदेश, विकास मुंडा की मौजूदगी रही चर्चा में
आयोजकों का दावा है कि इस महाजुटान में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों समेत लाखों की तादाद में लोग पहुंचे। हालांकि सीएम हेमंत सोरेन कार्यक्रम में नहीं आए, लेकिन विकास मुंडा को भेजकर झामुमो ने यह साफ कर दिया कि सरकार इस आयोजन और समाज की मांगों को गंभीरता से ले रही है। बंधु तिर्की की अगुवाई में उमड़ी इस भारी भीड़ ने आने वाले दिनों के लिए एक बड़ा सियासी संदेश दे दिया है।
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