गांधी जयंती से एक महीने पहले क्यों शुरू होगा बापूधाम महोत्सव? अधिवक्ता के सवाल से गरमाई बहस
चंपारण में प्रस्तावित बापूधाम महोत्सव की 1 सितंबर से शुरुआत को लेकर हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमार अमित ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि महात्मा गांधी का जन्मदिवस 2 अक्टूबर है


मोतिहारी: महात्मा गांधी की कर्मभूमि चंपारण में प्रस्तावित बापूधाम महोत्सव की तारीख को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जिला प्रशासन और कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से आयोजित किए जा रहे इस महोत्सव की शुरुआत 1 सितंबर से प्रस्तावित है। इसी को लेकर मोतिहारी निवासी हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमार अमित ने आयोजन की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। अधिवक्ता का कहना है कि जब महोत्सव का केंद्र महात्मा गांधी और चंपारण की ऐतिहासिक विरासत है, तो इसकी शुरुआत गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से की जाती तो इसका संदेश और प्रभाव अधिक व्यापक हो सकता था।
गांधी जयंती से पहले महोत्सव शुरू करने पर सवाल
कुमार अमित ने सवाल उठाते हुए कहा कि महात्मा गांधी का जन्मदिवस 2 अक्टूबर को मनाया जाता है। ऐसे में गांधी और चंपारण सत्याग्रह से जुड़े महोत्सव को 1 सितंबर से शुरू करने के बजाय 2 अक्टूबर से शुरू किया जा सकता था। उनका सुझाव है कि 2 अक्टूबर से एक महीने तक बापूधाम महोत्सव आयोजित किया जाता, जिसमें चंपारण की गांधी विरासत, सत्याग्रह, ग्राम स्वराज, कृषि, स्थानीय कला-संस्कृति, खेल और लोक परंपराओं को प्रमुखता दी जाती।
अधिवक्ता कुमार अमित ने कहा कि चंपारण केवल बिहार ही नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। महात्मा गांधी का चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल है। ऐसे में उनका कहना है कि गांधी से जुड़े किसी भी बड़े सरकारी आयोजन की तारीख तय करते समय गांधी के योगदान और ऐतिहासिक महत्व को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया, “क्या अब सरकारी महोत्सवों की तारीखें महापुरुषों के योगदान से नहीं, नेताओं के जन्मदिन से तय होंगी?”
एक महीने तक गांधी और चंपारण की विरासत को समर्पित करने का सुझाव
कुमार अमित के मुताबिक, यदि महोत्सव को 2 अक्टूबर से शुरू किया जाता तो पूरे एक महीने तक अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए चंपारण की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने रखा जा सकता था। इस दौरान चंपारण सत्याग्रह और गांधी विचारधारा पर परिचर्चा, ग्राम स्वराज, कृषि, स्थानीय कला-संस्कृति, लोक परंपराओं और युवाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते थे। उनका मानना है कि इससे नई पीढ़ी को गांधी के विचारों और चंपारण के ऐतिहासिक महत्व से जोड़ने में भी मदद मिलती।
अब आयोजन की तारीख को लेकर चर्चा तेज
बापूधाम महोत्सव की प्रस्तावित तारीख को लेकर उठे इन सवालों के बाद आयोजन के उद्देश्य और टाइमिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अधिवक्ता की ओर से उठाए गए सवालों पर जिला प्रशासन या आयोजन से जुड़े अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल महोत्सव की शुरुआत 1 सितंबर से प्रस्तावित है। अब देखना होगा कि तारीख को लेकर उठे सवालों पर प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।
चंपारण की ऐतिहासिक विरासत और महात्मा गांधी से इसके गहरे जुड़ाव को देखते हुए यह बहस भी महत्वपूर्ण हो गई है कि बापूधाम महोत्सव की तारीख तय करने का आधार क्या होना चाहिए- प्रशासनिक सुविधा या गांधी और चंपारण के इतिहास से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण दिन?
(मोतिहारी से प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)

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