'बिना गलती के क्यों दी सजा?', JPSC परीक्षा रद्द होने पर बगावत, नौकरी बचाने हाईकोर्ट पहुंचे अधिकारी
JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी है। मामले में अब तक तीन याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं।

JPSC case reaches High Court: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में धांधली के विरोध में छात्रों के जबरदस्त आंदोलन के बाद सरकार ने परीक्षाएं तो रद्द कर दीं, लेकिन अब यह पूरा विवाद एक नए कानूनी बवंडर में फंस गया है। सड़कों पर मचा बवाल भले ही थमता दिख रहा हो, लेकिन अब यह लड़ाई हाईकोर्ट के दरवाजे तक जा पहुंची है। जिन लोगों का जेपीएससी के जरिए चयन हो चुका था और जो आराम से अपनी सरकारी नौकरी कर रहे थे, अब उनकी आंखों की नींद उड़ गई है। अपनी नौकरी पर मंडराते इस खतरे को देखकर इन नवनियुक्त कर्मचारियों ने कोर्ट की शरण ली है।
सड़कों के बाद अब कोर्ट की चौखट पर पहुंची लड़ाई
सरकार द्वारा एक झटके में परीक्षाएं रद्द किए जाने के फैसले से चयनित उम्मीदवारों को बहुत बड़ा झटका लगा है। उनका कहना है कि जिन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा पास करके पद हासिल किया था, उन्हें बिना किसी गलती के सजा क्यों दी जा रही है? इसी नाराजगी के चलते अवधेश कुमार समेत कई अन्य अफसरों ने राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पूरी परीक्षा को रद्द करना उन लोगों के साथ सरासर अन्याय है जो अपनी योग्यता के दम पर सेवा में आए थे।
रातों-रात छिन गई नौकरी तो सरकार के फैसले को दी चुनौती
इस मामले में अब तक हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। जिन लोगों की नियुक्ति हो चुकी थी, उनके सामने अब अपने करियर और रोजी-रोटी को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। याचिकाओं में राज्य सरकार के उस आदेश को सीधे कटघरे में खड़ा किया गया है, जिसके तहत भर्ती रद्द करने का फरमान सुनाया गया था। हालांकि, अभी याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है, लेकिन जब इस पर बहस शुरू होगी तो यह देखना बेहद अहम होगा कि अदालत इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाती है।
हाईकोर्ट के जाने-माने वकील संभालेंगे केस, सबकी नजरें टिकीं
कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए प्रार्थियों ने राज्य के बड़े कानूनी विशेषज्ञों को मैदान में उतारा है। हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और पीयूष चित्रेश याचिकाकर्ताओं की तरफ से पैरवी करेंगे और सरकार के फैसले के खिलाफ दलीलें रखेंगे। इस कानूनी जंग ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ धांधली के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र हैं, तो दूसरी तरफ अपनी नौकरी बचाने की जंग लड़ रहे चयनित अभ्यर्थी। अब हाईकोर्ट के फैसले पर ही दोनों पक्षों का भविष्य टिका हुआ है।
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