'जब ADG खुद इंटरव्यू बोर्ड में थे, तो CID कैसे करेगी निष्पक्ष जांच?', JPSC सिविल सेवा मामले में बाबूलाल का बड़ा हमला
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब इस बहाली प्रक्रिया के इंटरव्यू चरण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।


Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब इस बहाली प्रक्रिया के इंटरव्यू चरण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इंटरव्यू में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये वसूले जाने के आरोपों का हवाला देते हुए अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे प्रकरण की जांच तत्काल प्रभाव से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की जोरदार मांग की है।
इंटरव्यू बोर्ड को 'मैनेज' करने और कोड-डिकोड का सनसनीखेज दावा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सिलसिलेवार तरीके से अपनी बात रखते हुए कहा कि दागी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के कर्ताधर्ता रामवीर सिंह और मास्टरमाइंड अभय तिवारी द्वारा जेपीएससी के इंटरव्यू बोर्ड को 'मैनेज' करने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान रामवीर सिंह ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि कोड-डिकोड प्रणाली के जरिए अभ्यर्थियों को तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों के विशेष बोर्ड के समक्ष इंटरव्यू के लिए भेजा जाता था। इतना ही नहीं, इंटरव्यू में अभ्यर्थियों से अवैध वसूली के मामले में तत्कालीन जेपीएससी सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक (PA) ब्रजराम की पूर्व में ही गिरफ्तारी हो चुकी है, जो इन आरोपों को पुख्ता करती है।
CID की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, ADG स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर चर्चा
मरांडी ने इंटरव्यू बोर्ड में शामिल वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका को भी कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि खुद सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) मनोज कौशिक समेत कई अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी जेपीएससी के उस इंटरव्यू बोर्ड का अहम हिस्सा रहे थे। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष ने सवाल दागा कि जब बोर्ड में शामिल अधिकारियों की कार्यशैली पर ही संदेह जताया जा रहा है, तो उसी जांच एजेंसी के अधीन पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कैसे संभव हो सकती है।
दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए CBI जांच जरूरी
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि राज्य के लाखों होनहार अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने के लिए इस पूरे सिंडिकेट की जांच सीबीआई के सुपुर्द की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इंटरव्यू को मैनेज करने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो उस दौरान इंटरव्यू बोर्ड में शामिल रहे सभी अधिकारियों के बयान विधिवत दर्ज किए जाएं और उनकी भूमिका की गहराई से निष्पक्ष जांच हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी सफेदपोश या अधिकारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी मेधावी छात्र के हक पर डाका न डाला जा सके।

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

परीक्षा रद्द होते ही झारखंड में बड़ा प्रशासनिक संकट!, खाली हो गईं सैकड़ों कुर्सियां, ठप्प पड़ा सरकारी काम

'सुप्रीम कोर्ट से जीते, पर सिस्टम से हार रहे युवा!', JAP-1 ग्राउंड में दिनभर भटके झारखंड कांस्टेबल भर्ती के 888 अभ्यर्थी







