'किस कानून से बनाई कमेटी?' JH हाईकोर्ट की फटकार के बाद बैकफुट पर गढ़वा प्रशासन, DC को माननी पड़ी गलती!
गढ़वा जिले के नगर उंटारी (श्री बंशीधर नगर) स्थित ऐतिहासिक राजा पहाड़ी शिव मंदिर के प्रशासनिक नियंत्रण और पुजारी के सामान की जब्ती मामले में झारखंड हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।


Jharkhand High Court: गढ़वा जिले के नगर उंटारी (श्री बंशीधर नगर) स्थित ऐतिहासिक राजा पहाड़ी शिव मंदिर के प्रशासनिक नियंत्रण और पुजारी के सामान की जब्ती मामले में झारखंड हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ के समक्ष गढ़वा के उपायुक्त (DC) और श्री बंशीधर नगर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। अदालत के बेहद कड़े और सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा और उपायुक्त को कोर्ट के समक्ष अपनी प्रशासनिक गलती स्वीकार करनी पड़ी।
100 साल पुरानी आस्था का प्रतीक है मंदिर, SDO ने बनाई थी गैर-कानूनी कमेटी
उल्लेखनीय है कि राजा पहाड़ी शिव मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की लगभग 100 वर्षों की कड़ी मेहनत, समर्पण और अगाध आस्था का केंद्र है। मंदिर के सुचारू संचालन और रखरखाव के लिए एक वैधानिक निबंधित ट्रस्ट (Registered Trust) पहले से विधिवत कार्यरत है। हाल ही में कुछ स्थानीय लोगों की शिकायत का हवाला देते हुए बंशीधर नगर के एसडीओ ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर मनमाने ढंग से ट्रस्ट को दरकिनार कर दिया था। एसडीओ ने न केवल एक नई प्रशासनिक कमेटी का गठन किया, बल्कि खुद उसके सचिव पद पर आसीन हो गए और मंदिर के पुजारी के सामान को जब्त कर लिया। इस मनमानी और गैर-कानूनी प्रशासनिक हस्तक्षेप के खिलाफ निबंधित ट्रस्ट ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट के तीखे सवाल पर निरुत्तर हुए SDO, DC ने मानी गलती
सुनवाई के दौरान ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा ने मजबूती से पक्ष रखा। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने ऑनलाइन उपस्थित गढ़वा डीसी और बंशीधर नगर एसडीओ से सीधा सवाल पूछा कि किस कानून के तहत एक वैधानिक और निबंधित ट्रस्ट को समाप्त कर प्रशासनिक कमेटी बनाई गई? एसडीओ को ऐसा करने का अधिकार किस नियमावली ने दिया? अदालत के इस तीखे सवाल पर एसडीओ पूरी तरह निरुत्तर हो गए।
आदेश निरस्त करने के आश्वासन पर टली सुनवाई
मामले की गंभीरता और अदालत के कड़े तेवर को देखते हुए गढ़वा उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने अदालत को बताया कि वास्तव में यह कार्रवाई प्रशासनिक क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर की गई थी और प्रशासन से बड़ी चूक हुई है। उपायुक्त द्वारा विवादित आदेश को तत्काल निरस्त करने और मंदिर में पूर्ववत स्थिति बहाल करने के मौखिक व लिखित आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है। अब देखना होगा कि तय समय-सीमा के भीतर जिला प्रशासन अपना गैर-कानूनी आदेश वापस लेकर मंदिर का प्रभार मूल निबंधित ट्रस्ट को सौंपता है या नहीं।

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