कुड़मी समुदाय के ST में शामिल करने की मांग के खिलाफ राजभवन पहुंचा आदिवासी बचाओ संघर्ष समिति, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
आदिवासी बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने राज्यपाल से मांग करते हुए कहा कि कुड़मी समाज किसी भी तरह से आदिवासी समाज में शामिल नहीं हो सकता है उन्हें आदिवासी का दर्जा नहीं मिल सकता है.

Naxatra News Hindi
Ranchi Desk: झारखंड में कुड़मी और आदिवासी समुदाय को लोग एक-दूसरे के सामने आ गए हैं राज्य में कुड़मी समाज लगातार खुद को आदिवासी का दर्जा दिलाने की मांग कर रहा है वहीं आदिवासी समुदाय के लोग कुड़मी समाज के इस मांग का विरोध कर रहे हैं. अब इस मामले को लेकर आदिवासी बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य राजभवन पहुंचे. जहां उन्होंने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात करते हुए उन्हें ज्ञापन पत्र सौंपा.
राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने पहुंचे आदिवासी बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने राज्यपाल से मांग करते हुए कहा कि कुड़मी समाज किसी भी तरह से आदिवासी समाज में शामिल नहीं हो सकता है उन्हें आदिवासी का दर्जा नहीं मिल सकता है. उन्होंने राज्यपाल को बताया कि ट्राई का रिपोर्ट भी आया है जिसमें ये लोग शुरू से अपने को क्षत्रिय बताते हैं. कुड़मी समाज ने फिर से एक बार रेल रोको आंदोलन किया जिससे काफी क्षति हुई है. केंद्र सरकार को इसपर भी कुड़मी समाज को जुर्माना सुनाना चाहिए.
कुड़मी ने रेल टेका डहर छेका का किया आंदोलन
बता दें, बीते 20 सितंबर 2025 (शनिवार) को कुड़मी समाज ने 'रेल टेका डहर छेका' का आनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया. इसके तहत कुड़मी समाज के लोगों के साथ आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो सहित पार्टी के सासंद और पूर्व विधायक ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में काफी संख्या में आंदोलन में हिस्सा लिया. जहां उन्होंने केंद्र से कुड़मी समाज को आदिवासी का दर्जा दिलाने की मांग की. कुड़मी समुदाय के लोगों को विश्वास दिलाते हुए सुदेश महतो ने कहा कि केंद्र सरकार को उनकी मांगों को मानना ही पड़ेगा. जबतक सरकार उनकी मांग को नहीं मानती है तबतक वे इस आंदोलन को जारी रखेंगे.
कुड़मी की मांग के विरोध में सड़कों पर उतरा आदिवासी संगठन
वहीं कुड़मी समाज के आंदोलन और उनकी मांगों के खिलाफ कई आदिवासी संगठन भी 20 सितंबर को सड़कों पर उतरे. उनका कहना है कि कुड़मी समुदाय के लोग आदिवासी नहीं है वो खुद को आदिवासी कहते हैं लेकिन वे लोग न कभी आदिवासी थे न है और न कभी रहेंगे. वे लोग आदिवासियों का हक और आरक्षण छिनने के लिए षडयंत्र के तहत ST दर्जा से हटाए जाने की बात कह रहे हैं लेकिन वैसा कुछ नहीं है. हमलोग उन्हें आदिवासी समुदाय का दर्जा लेने नहीं देंगे. ये हमारा छोटा आंदोलन है जरूरत पड़ी तो भव्य रुप से आंदोलन किया जाएगा.
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