12 साल की उम्र में झेला एसिड अटैक... 'बनारस की लता' प्रो. मंगला कपूर को मिलेगा पद्म श्री सम्मान
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की पूर्व प्रोफेसर और प्रख्यात शास्त्रीय गायिका डॉ. मंगला कपूर को केंद्र सरकार ने पद्म श्री सम्मान से नवाजने की घोषणा की है. एसिड अटैक जैसी त्रासदी को हराकर देश भर में संगीत की अलख जगाने वाली प्रो. कपूर का जीवन प्रेरणा की मिसाल है.

Padma Shree 2026: कला और शिक्षा जगत के लिए एक बेहद गौरवशाली खबर सामने आई है. भारत सरकार ने देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक 'पदम श्री' पुरस्कार के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत विभाग की पूर्व प्रोफेसर और वरिष्ठ शास्त्रीय गायिका डॉ. मंगला कपूर के नाम की आधिकारिक घोषणा की है. उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान संगीत शिक्षाशास्त्र, शोध और भारतीय शास्त्रीय संगीत परंपराओं के अद्वितीय संरक्षण व प्रसार के लिए दिया जा रहा है. इस घोषणा के बाद काशी के कला जगत और शिक्षा क्षेत्र में हर्ष की लहर दौड़ गई है.
एसिड अटैक के दर्द को हराकर बनीं मिसाल
72 वर्षीय प्रो. मंगला कपूर का जीवन केवल संगीत साधना ही नहीं, बल्कि अदम्य साहस और संघर्ष की एक अद्भुत गाथा है. बचपन में महज 12 वर्ष की आयु में वे एक भयानक एसिड अटैक (तेजाब हमले) का शिकार हुई थीं, जिसके बाद उन्हें वर्षों तक अस्पताल में रहना पड़ा और करीब 37 सर्जरी से गुजरना पड़ा. इस घोर शारीरिक और मानसिक पीड़ा के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की, बीएचयू से संगीत में स्वर्ण पदक के साथ एम. म्यूजिक और पीएच.डी. की उपाधि हासिल की और वहीं तीन दशकों तक प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष के रूप में सेवा दी.
ग्वालियर घराने का प्रतिनिधित्व और साहित्यिक कार्य
15 जनवरी 1954 को वाराणसी में जन्मी प्रो. कपूर ने पंडित सुरेंद्र मोहन मिश्रा से ग्वालियर घराने और अर्ध-शास्त्रीय संगीत में कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त किया था. बीएचयू के महिला महाविद्यालय (MMV) में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में कई नए प्रतिमान स्थापित किए. उन्होंने संगीत विधा पर पांच महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं, जिनमें उनकी बहुचर्चित आत्मकथा 'सीरत' शामिल है, जो एक कलाकार और सर्वाइवर के रूप में उनके जीवन के संघर्षों को बयां करती है. उनके जीवन से प्रेरित होकर एक मराठी फिल्म 'मंगला' का निर्माण भी किया जा चुका है.
'प्रोफेसर मंगला कपूर फाउंडेशन' के जरिए मुफ्त शिक्षा
एक प्रख्यात कलाकार के तौर पर गंगा महोत्सव और सुबह-ए-बनारस जैसे मंचों पर अपनी गायकी का जादू बिखेरने वाली प्रो. कपूर समाज सेवा में भी सक्रिय हैं. कला जगत में "बनारस की लता" के नाम से मशहूर प्रो. कपूर सेवानिवृत्ति के बाद अपने घर पर ही 'प्रोफेसर मंगला कपूर फाउंडेशन' का संचालन करती हैं. इसके माध्यम से वे समाज के आर्थिक रूप से वंचित, कमजोर और दिव्यांग बच्चों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की मुफ्त शिक्षा प्रदान कर रही हैं, ताकि आर्थिक तंगी किसी के हुनर के आड़े न आए.
अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों की सूची में जुड़ा सर्वोच्च सम्मान
पद्म श्री की इस घोषणा से पहले भी प्रो. कपूर को समाज और संगीत में उनके योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं. इनमें उत्तर प्रदेश सरकार का 'राज्य रोल मॉडल पुरस्कार' (2021), सक्षम सोसाइटी का 'राष्ट्रीय पुरस्कार', 'सुषमा स्वराज सम्मान', 'राष्ट्र गौरव सम्मान' और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का 'आचार्य भारत मुनि पुरस्कार' (2024) शामिल हैं. पद्म श्री मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें इस बड़ी खबर पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन यह सम्मान उनके वर्षों के कड़े संघर्ष और संगीत के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रतिफल है.
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