साहब! नदी पर पुल बना दो..., चतरा में उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल
चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड से झारखंड की ग्रामीण बुनियादी व्यवस्था और स्कूली शिक्षा की बदहाली को उजागर करने वाली एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
Chatra: चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड से झारखंड की ग्रामीण बुनियादी व्यवस्था और स्कूली शिक्षा की बदहाली को उजागर करने वाली एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां पढ़ने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए स्कूल तक का सफर केवल एक पगडंडी भर नहीं है, बल्कि हर दिन जिंदगी और मौत के बीच का खतरनाक संघर्ष बन चुका है। नदी पर पुल की सुविधा न होने के कारण बारिश के इस मौसम में मासूम बच्चों को जान हथेली पर रखकर उफनती धार और तेज बहाव के बीच से गुजरकर स्कूल जाना पड़ रहा है।
बारिश आते ही उफान पर नदी, हर कदम पर हादसे का साया
बरसात का मौसम शुरू होते ही स्थानीय नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और पानी का बहाव बेहद तेज हो जाता है। यही वह दौर होता है जब इन नौनिहालों की शिक्षा पर खतरे के बादल मंडराने लगते हैं। स्कूल पहुंचने की एकमात्र मजबूरी के चलते कई छोटे बच्चे घंटों तक पानी की धार कम होने का इंतजार करते हैं, तो वहीं कई बच्चे स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का हाथ थामकर तेज धार को चीरते हुए किसी तरह पार निकलते हैं। तेज बहाव में संतुलन बिगड़ते ही बच्चों के बह जाने का खतरा लगातार बना रहता है।
शिक्षकों के लिए भी डरावना सफर
इस गंभीर समस्या की मार केवल बच्चों पर ही नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों पर भी पड़ रही है। विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि बरसात के दिनों में रोजाना स्कूल आना-जाना किसी बुरे सपने से कम नहीं होता। नदी का जलस्तर चढ़ते ही बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी उसी जानलेवा पानी से होकर निकलना पड़ता है। कई बार पानी का दबाव इतना ज्यादा होता है कि स्कूल पहुंचना पूरी तरह असंभव हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई सीधे तौर पर बाधित होती है।
हादसे से पहले क्यों नहीं जागता प्रशासन?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस नदी पर पुल निर्माण की मांग कई वर्षों से लगातार उठाई जा रही है। हर साल मानसून आते ही यह समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है, नेता और अफसर आश्वासन तो देते हैं मगर बारिश बीतते ही फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार की बेरुखी पर कड़ा रोष जताते हुए सवाल उठाया है कि क्या सिस्टम किसी मासूम बच्चे के बह जाने या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही हरकत में आएगा? ग्रामीणों ने मांग की है कि किसी गंभीर दुर्घटना का इंतजार किए बिना नदी पर तुरंत पक्के पुल का निर्माण कराया जाए।
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