सरायकेला की आदिवासी युवती के साथ मारपीट, पुलिस अधिकारियों पर लग रहे गंभीर आरोप
आदिवासी युवती पर पुलिस अधिकारियों द्वारा मारपीट करने का आरोप लगाया जा रहा है. अल्पना जो पुणे में जॉब करती है, उसे एक सिलसिले में अपने गांव के नजदीकी थाने जाना पड़ा. जहां पुलिसवालों ने उसके साथ बर्बर तरीके से मारपीट की और उसकी तबियत बिगड़ गई.

Saraikela, Jharkhand : सरायकेला-खरसावां जिला एक बार फिर पुलिस के कथित अमानवीय व्यवहार को लेकर सुर्खियों में है. हाल ही में रुचाप गांव में एक आदिवासी महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में कार्रवाई हुई थी, वहीं अब कपाली ओपी पुलिस पर एक आदिवासी युवती ने गंभीर आरोप लगाए हैं. युवती का कहना है कि पूछताछ के नाम पर उसे ओपी बुलाकर मारपीट की गई. उसके पीठ पर लाल धब्बे नजर आ रहे हैं, तो हाथों पर भी मारपीट के निशान दिखाई दे रहे हैं.
सरायकेला जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी निवासी करीब 27 वर्षीय अल्पना माहली ने आरोप लगाया है कि 15 जून की शाम उसे कपाली ओपी बुलाया गया था. वहां उसकी लापता सहेली तस्कीन खान के संबंध में पूछताछ की गई. बताते चलें कि तस्कीन नामक युवती बीते 1 जून से लापता है.
अल्पना ने बताया कि वह पुणे की एक कंपनी में काम करती है. जहां पुलिस से उसकी इसी सिलसिले में बातचीत फोन पर हुई थी. उसने बताया कि पुलिस उसके घरवालों को परेशान न करे इसलिए वह फौरन पुणे से अपने घर आ गई थी. जिसके बाद उसे पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया.
अल्पना का दावा है कि पूछताछ के दौरान उसे एक कमरे में बंद कर बर्बर तरीके से पीटा गया. बताया कि पुलिस कर्मी उसके पैर पर जूते पहनकर चढ़ गए थे. मारपीट के कारण उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई थी. उसका आरोप है कि पुलिस अधिकारी उससे जबरन उगलवाना चाहते थे कि लड़की उसके पास है या उसके संपर्क में है, जबकि लापता लड़की से उसकी बातचीत नहीं होती. इधर आज सुबह युवती की हालत खराब हो गई, जिसे इलाज के लिए परिजन MGM अस्पताल जमशेदपुर ले गए हैं.
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है. सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि आरोप सही हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
यह मामला केवल एक युवती के आरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है. झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है, ऐसे में आदिवासी युवती द्वारा पुलिस पर लगाए गए आरोप चिंताजनक हैं. हालांकि सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होना जरूरी है. फिलहाल पूरे मामले में जिला पुलिस प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं.
(कांग्रेस महतो की रिपोर्ट)
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