नसबंदी के साथ कुत्तों के लिए अलग शेल्टर!, रांची नगर निगम ने बड़गाई में तय की 1 एकड़ 90 डिसमिल जमीन
राजधानी रांची में आवारा श्वानों (कुत्तों) की बढ़ती संख्या पर प्रभावी नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने एक बड़ी पहल की है।

Ranchi: राजधानी रांची में आवारा श्वानों (कुत्तों) की बढ़ती संख्या पर प्रभावी नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने एक बड़ी पहल की है। रांची नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने निगम की तकनीकी टीम के साथ बड़गाई स्थित प्रस्तावित पशु आश्रय सह जन्म नियंत्रण केंद्र (एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर) के लिए चिन्हित जमीन का स्थलीय निरीक्षण किया। नगर आयुक्त ने बताया कि इस अत्याधुनिक केंद्र के निर्माण के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, झारखंड सरकार की ओर से रांची नगर निगम को 2.10 करोड़ रुपये की वित्तीय राशि उपलब्ध करा दी गई है।
20.2 डिसमिल में बनेगा जन्म नियंत्रण केंद्र, नसबंदी और टीकाकरण की होगी व्यवस्था
परियोजना के अनुसार, मौजा बड़गई के खाता संख्या-140 और प्लॉट संख्या-767 में उपलब्ध कुल 1 एकड़ 90 डिसमिल सरकारी भूमि में से 20.2 डिसमिल जमीन पर पशु आश्रय सह जन्म नियंत्रण केंद्र विकसित किया जाएगा। इस केंद्र में मुख्य रूप से आवारा श्वानों की नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण और जरूरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की वैज्ञानिक व्यवस्था की जाएगी। इससे शहर में श्वानों की आबादी को मानवीय तरीके से नियंत्रित करने के साथ-साथ जानलेवा रेबीज जैसी बीमारियों के प्रसार को रोकने और शहरवासियों को सुरक्षित माहौल देने में बड़ी मदद मिलेगी। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को केंद्र निर्माण से जुड़े टेंडर (निविदा) और अन्य कागजी प्रक्रियाओं को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।
बाकी जमीन पर बनेगा सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन वाला डॉग शेल्टर होम
नगर आयुक्त ने बड़गाई की कुल 1 एकड़ 90 डिसमिल जमीन के शेष हिस्से में शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक आधुनिक डॉग शेल्टर होम विकसित करने का प्रस्ताव और डिजाइन तैयार करने का निर्देश दिया। इस शेल्टर होम में आक्रामक, लावारिस और रेबीज प्रभावित श्वानों को अलग-अलग रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। पूरे परिसर में सुरक्षा के लिए गार्ड रूम, मजबूत बाउंड्री वॉल और सुगम आवागमन मार्ग भी तैयार किए जाएंगे। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य सिर्फ श्वानों की संख्या को रोकना नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन की एक पुख्ता और मानवीय व्यवस्था तैयार करना है।

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