सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु समग्र कार्ययोजना पर होगा अमल : उपायुक्त
पलामू जिले में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने शनिवार को पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी के साथ पोखराहा खुर्द स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-39 (एनएच-39) और पांकी–मेदिनीनगर मार्ग के संगम स्थल (इंटरसेक्शन) का स्थल निरीक्षण किया।

Palamu जिले में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने शनिवार को पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी के साथ पोखराहा खुर्द स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-39 (एनएच-39) और पांकी–मेदिनीनगर मार्ग के संगम स्थल (इंटरसेक्शन) का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क सुरक्षा की स्थिति का जायजा लिया तथा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि केवल किसी एक परिवार का नुकसान नहीं होती, बल्कि पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल दुर्घटनाओं के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति ही न हो। उपायुक्त ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों के अनुरूप चेतावनी संकेतक, दिशा-सूचक बोर्ड, गति सीमा संबंधी सूचना पट्ट और परावर्तक सुरक्षा संकेत तत्काल लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि सड़क पर चलने वाले लोगों को समय रहते आवश्यक जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे सुरक्षित तरीके से वाहन चला सकें। निरीक्षण के दौरान संगम स्थल पर आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल लगाने पर भी विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्ग से आने-जाने वाले वाहनों की संख्या काफी अधिक रहती है, इसलिए दोनों दिशाओं में सुव्यवस्थित संकेत प्रणाली विकसित करना आवश्यक है। इससे यातायात नियंत्रित रहेगा और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। उन्होंने सड़क किनारे मौजूद अवरोधों को हटाने, दृश्यता बढ़ाने, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने, स्पष्ट रोड मार्किंग कराने तथा परावर्तक कैट्स-आई और चेतावनी पट्ट लगाने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि कई बार दृश्यता की कमी और अस्पष्ट संकेतों के कारण भी दुर्घटनाएं होती हैं, इसलिए इन कमियों को जल्द दूर किया जाना चाहिए। पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देश देते हुए उपायुक्त ने कहा कि राज्य मार्ग से राष्ट्रीय राजमार्ग में मिलने वाले ढलानदार संपर्क मार्गों के ढाल को तकनीकी मानकों के अनुरूप कम किया जाए। इससे मुख्य सड़क पर प्रवेश करने वाले वाहनों की गति नियंत्रित रहेगी और अचानक तेज गति के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। इसके अलावा उन्होंने आवश्यक स्थानों पर वैज्ञानिक तरीके से स्पीड ब्रेकर और पुलिस बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाकर सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। दीर्घकालिक समाधान के लिए उपायुक्त ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक को निर्देश दिया कि 10 जुलाई तक विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) में आवश्यक संशोधन कर क्षेत्रीय कार्यालय को अनुमोदन के लिए भेजा जाए। उन्होंने कहा कि संशोधित डीपीआर में रोड सेफ्टी ऑडिट की अनुशंसाओं, वर्तमान यातायात दबाव, भविष्य की जरूरतों और आधुनिक सड़क अभियांत्रिकी के सभी मानकों को शामिल किया जाए। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध है। दुर्घटना संभावित स्थलों की नियमित समीक्षा की जाएगी तथा सभी संबंधित विभागों के समन्वय से अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुधार कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे कराए जाएंगे। उन्होंने आम नागरिकों से भी यातायात नियमों का पालन करने, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने तथा सड़क संकेतों का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और नागरिकों की भी समान भागीदारी आवश्यक है। निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, अभियंता एवं संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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