छात्र की सरेआम हत्याकांड! एक माह बाद भी मुख्य आरोपी फरार, SIT की कार्यशैली पर उठे सवाल
पूर्वी चंपारण के कोटवा कॉलेज कैंपस में बीए परीक्षा देने आए एक छात्र की दिनदहाड़े चाकू मारकर हत्या किए जाने के मामले में एक माह बीत जाने के बाद भी पुलिस को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है।

पूर्वी चंपारण के कोटवा कॉलेज कैंपस में बीए परीक्षा देने आए एक छात्र की दिनदहाड़े चाकू मारकर हत्या किए जाने के मामले में एक माह बीत जाने के बाद भी पुलिस को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। मुख्य आरोपी अब भी फरार है, जिसके कारण इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, कल्याणपुर थाना क्षेत्र के देवपुर परसा गांव निवासी विद्या यादव के 25 वर्षीय पुत्र रितेश यादव कोटवा हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर बीए की परीक्षा देने आया था। परीक्षा समाप्त होने के बाद जैसे ही वह कॉलेज परिसर से बाहर निकला, उसी गांव के रहने वाले सरोज यादव ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। यह पूरी घटना कॉलेज परिसर में मौजूद लोगों के सामने हुई। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
घटना के बाद गंभीर रूप से घायल रितेश को परिजन इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दिनदहाड़े हुई इस हत्या से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी और लोगों में भारी आक्रोश देखा गया था।
एसपी ने किया था SIT का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मोतिहारी पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने तत्काल विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। इस टीम की कमान सदर डीएसपी-2 जितेश पांडे को सौंपी गई थी। उम्मीद थी कि SIT जल्द ही मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा करेगी, लेकिन एक माह बाद भी पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच सकी है।
SIT ने शुरुआती दौर में घटना में शामिल एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया लेकिन इसके बाद जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई। मुख्य आरोपी सरोज यादव अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
मीडिया के सवालों के बाद घोषित हुआ इनाम
इस मामले में SIT की धीमी कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। मीडिया द्वारा जब पुलिस अधीक्षक से आरोपी की गिरफ्तारी में हो रही देरी को लेकर सवाल किया गया, तब जाकर मुख्य आरोपी सरोज यादव पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। इसके बाद पुलिस की कार्यशैली और SIT की सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हो गई।
वीडियो फुटेज के बावजूद गिरफ्तारी नहीं
इस हत्याकांड का सबसे अहम पहलू यह है कि घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों ने पूरी वारदात का वीडियो बना लिया था। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ। वीडियो में घटना और आरोपी की पहचान को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस के पास वीडियो फुटेज जैसा महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद है, आरोपी की पहचान भी स्पष्ट है, तब भी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी? आखिर वह कौन-सी बाधा है जो जांच एजेंसी को आरोपी तक पहुंचने से रोक रही है?
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
आम तौर पर छोटे-छोटे मामलों में भी पुलिस कुछ घंटों के भीतर आरोपियों पर इनाम घोषित कर देती है और कुर्की-जब्ती जैसी कानूनी कार्रवाई शुरू कर देती है। लेकिन इस चर्चित छात्र हत्याकांड में एक महीने तक ऐसी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस तरह के संवेदनशील मामले में भी आरोपी लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहता है, तो इससे जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि हर महत्वपूर्ण कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद ही होनी है, तो फिर SIT और स्थानीय थाना की भूमिका क्या है? एक माह बाद भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना न केवल जांच SIT की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि पीड़ित परिवार के न्याय की उम्मीदों को भी प्रभावित कर रहा है।
फिलहाल पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी का दावा कर रही है, लेकिन रितेश यादव हत्याकांड में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर मुख्य आरोपी कब तक कानून के शिकंजे में आता है।
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