धुर्वा में RSS की नींव रखने वाले पंडित गोरखनाथ मिश्र नहीं रहे, निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस
राजधानी रांची के धुर्वा नर्स कॉलोनी निवासी और सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के संस्थापक सदस्यों में से एक पंडित गोरखनाथ मिश्र का रविवार को निधन हो गया।
Ranchi: राजधानी रांची के धुर्वा नर्स कॉलोनी निवासी और सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के संस्थापक सदस्यों में से एक पंडित गोरखनाथ मिश्र का रविवार को निधन हो गया। वे बीते कुछ दिनों से हड्डियों से जुड़ी बीमारी के चलते एक निजी अस्पताल में भर्ती थे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। रविवार को ही सिठियो मुक्ति धाम में उनका अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान से किया गया, जहां उनके बड़े बेटे अजय मिश्र ने उन्हें मुखाग्नि दी।
धुर्वा में संघ की शाखा शुरू करने वाले शुरुआती चेहरों में थे शामिल
पंडित गोरखनाथ मिश्र का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बेहद पुराना और गहरा नाता रहा। धुर्वा इलाके में जब संघ की शाखाओं की शुरुआत हुई थी, तब वे उन शुरुआती स्वयंसेवकों में शामिल थे जिन्होंने संगठन की नींव रखी। 1970 के दशक में उन्होंने नगर शारीरिक प्रमुख की बड़ी जिम्मेदारी संभाली और संघ के सामाजिक व संगठनात्मक अभियानों को आगे बढ़ाने में लगातार सक्रिय रहे।
शिशु विद्या मंदिर की स्थापना और विस्तार में निभाई अहम भूमिका
शिक्षा और संस्कारों के प्रसार में भी उनका योगदान बेहद खास रहा। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के शुरुआती दिनों में जब स्कूल ब्रह्मचारी आश्रम के पास संचालित होता था, तब वे उसके विस्तार और पूरी व्यवस्था को खड़ा करने वाले प्रमुख लोगों में से थे। उन्होंने स्कूल को मजबूत करने के लिए लंबे समय तक निस्वार्थ भाव से काम किया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य लोगों ने जताया गहरा दुख
पंडित गोरखनाथ मिश्र के निधन की खबर मिलते ही एचईसी इलाके और सामाजिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। अक्षय सिंह, अनिल कुमार झा, शिव गोविन्द पांडेय, शिवनंदन राम, अखिलेश्वर नाथ मिश्र, सतीश कुमार सिंह, डॉ. रंजीत कुमार सिंह और सुनील कुमार पांडेय समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने उनके जाने पर गहरा दुख जताया। इसके साथ ही लाल आशीष नाथ शाहदेव, सुनील दत्त सिंह, शंकर प्रसाद शुक्ल, धनेश्वर महतो, श्री वेंकट और अमरकांत झा समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की। सभी ने एक सुर में कहा कि पंडित गोरखनाथ मिश्र का पूरा जीवन सेवा, संगठन और संस्कारों के लिए समर्पित रहा और समाज निर्माण में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
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