बोकारो से गायब युवती का नहीं मिला सुराग, झारखंड हाईकोर्ट ने कहा- जरूरत पड़ी तो CBI को सौंपेंगे केस
बोकारो से लंबे समय से लापता युवती के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस और CID की जांच पर असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि यदि जांच में प्रगति नहीं हुई तो मामले की जांच CBI को सौंपी जा सकती है। पुलिस ने सोशल मीडिया डेटा के लिए मेटा से जानकारी लेने की बात कही है।

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट में बोकारो से लंबे समय से लापता एक युवती के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर अहम सुनवाई हुई। युवती की मां रेखा देवी द्वारा दायर इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य पुलिस और सीआईडी (CID) की जांच की दिशा पर कड़ी टिप्पणी की है।
मेटा से जानकारी मांगने की दलील
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई। गुरुवार को सुनवाई के दौरान पुलिस और सीआईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि लापता युवती के सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगालने पर कोई विशेष जानकारी हाथ नहीं लगी है। जांच एजेंसियों ने कोर्ट में दलील दी कि मामले में आगे की ठोस जानकारी जुटाने के लिए अब फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी 'मेटा' से संपर्क करना पड़ेगा।
कोर्ट ने कहा- केस CBI को सौंप सकते हैं
पुलिस और सीआईडी की ओर से दी गई इस दलील को सुनने के बाद अदालत ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। जांच एजेंसियों के जवाब पर असंतोष जताते हुए खंडपीठ ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि अगर जांच की गति और परिस्थितियां ऐसी ही रहीं, तो न्यायालय इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप सकता है।
पिंडरोजारी थाने में दर्ज है प्राथमिकी
आपको बता दें कि बोकारो की रहने वाली यह युवती काफी लंबे समय से गायब है। इस संबंध में परिजनों द्वारा बोकारो के पिंडरोजारी थाने में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई गई थी। हालांकि, मामला दर्ज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियां अभी तक युवती को बरामद करने में पूरी तरह विफल रही हैं। इसी लेटलतीफी और निराशा के कारण युवती की मां रेखा देवी ने न्याय की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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