गिरिडीह गोलिकांड में नया मोड़: हाई कोर्ट से बेल मिलते ही पुलिस ने किया गिरफ्तार, भेजा दिया गया जेल
गिरिडीह के पचम्बा में गोलीकांड के चार आरोपियों को उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने दूसरे मामले में रिमांड पर ले लिया. इस कार्रवाई को अधिवक्ता और आरोपियों ने साजिश बताते हुए अदालत परिसर में हंगामा किया.

Giridih, Jharkhand: पचम्बा थाना क्षेत्र में हुए चर्चित गोलीकांड के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. मृतकों के परिजनों द्वारा दर्ज कराए गए पचम्बा थाना कांड संख्या 16/26 में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बावजूद, पचम्बा पुलिस ने चार आरोपियों को गुरुवार की देर शाम इसी घटना से जुड़े दूसरे पुलिस केस में रिमांड पर ले लिया. इसके बाद शुक्रवार को जब पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरिडीह के सीजेएम कोर्ट में पेश किया, तो अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कोर्ट परिसर में आरोपियों और उनके परिजनों द्वारा जमकर विरोध और हंगामा किया गया.
आरोपियों ने लगाया प्रशासनिक साजिश का आरोप
रिमांड पर लिए गए चारों आरोपियों अमित विश्वकर्मा, मनजीत पासवान, किशोर कुमार और आकाश हांडी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश करार दिया है. आरोपियों का कहना है कि एक ही घटनाक्रम में दूसरी बार उनकी गिरफ्तारी होना पूरी तरह अतार्किक है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को उच्च स्तर से लगातार ऐसे संकेत मिल रहे थे कि चारों को किसी भी स्थिति में जेल के अंदर रखना है. आरोपियों ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब दोनों मामलों के अनुसंधानकर्ता (IO) प्रशांत सिंह ही हैं, तो 104 दिन बीत जाने के बाद भी दूसरे केस की चार्जशीट जमा करने में इतनी देरी क्यों की गई, जबकि पहले केस की चार्जशीट समय पर जमा हो चुकी थी.
एक घटना पर दो ट्रायल संभव नहीं: अधिवक्ता
इस मामले में आरोपियों के अधिवक्ता अजय सिन्हा मंटू ने पचम्बा थाना पुलिस की भूमिका पर तीखे कानूनी सवाल उठाए हैं. उन्होंने बताया कि कांड संख्या 16/26 में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जैसे ही चारों आरोपी जेल से बाहर निकले, जेल के बाहर पहले से मौजूद अनुसंधानकर्ता प्रशांत सिंह ने उन्हें पूछताछ के बहाने पचम्बा थाना कांड संख्या 15/26 में रिमांड पर ले लिया. अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने इस मामले में एकतरफा कार्रवाई की है. उन्होंने कहा कि घटना में गोली किसने चलाई, यह आज तक स्पष्ट नहीं हो सका है और पुलिस मुख्य आरोपी शिवम श्रीवास्तव सहित किसी भी मामले में अब तक हथियार बरामद नहीं कर पाई है. उन्होंने तर्क दिया कि एक ही अपराध के लिए दो अलग-अलग ट्रायल किसी भी अदालत में नहीं चलाए जा सकते.
निकाय चुनाव के दौरान भड़की थी हिंसक झड़प
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद निकाय चुनाव के दौरान शहर के बक्शीडीह स्थित मतदान केंद्र से शुरू हुआ था. बोगस मतदान को लेकर जेएमएम (JMM) के दो समर्थकों राजू खान और शिवम आजाद उर्फ शिवम श्रीवास्तव के बीच शुरू हुआ हंगामा शाम होते-होते हिंसक झड़प में बदल गया था. इस दौरान पचम्बा थाना के आजाद नगर में हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि उनका बेटा घायल हो गया था. इस मामले में मृतक की पत्नी के आवेदन पर मुख्य आरोपी शिवम और उसके सहयोगियों पर हत्या का केस दर्ज हुआ था, जबकि दूसरा केस सदर प्रखंड के एमओ (MO) द्वारा शिवम सहित अन्य अज्ञात लोगों पर दर्ज कराया गया था. इसी दूसरे मामले के आधार पर पुलिस ने यह रिमांड की कार्रवाई की है.
(गिरिडीह से मनोज कुमार पिंटू की रिपोर्ट)
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